गंगा देवी माहेश्वरी भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भक्ति गंगा में श्रद्धालुओं ने गोते लगाए। कथा वाचक ने नामकरण-बाललीला पूतना उद्धार, गोवर्धन पूजा-छप्पन भोग आदि लीलाओं का वर्णन किया।
कथावाचक पंडित जवाहर ने कहा कि माखन चोरी हो या गोपिकाओं के चीर हरण की लीला प्रभु की हर लीला में एक संदेश छिपा है जो कलियुगी मनुष्य की समझ से परे है। भगवान ने हमेशा यही संदेश दिया कि वह सिर्फ प्रेम के अधीन है। जिस मनुष्य ने प्रेम से उसको पाने की कोशिश की वह हर तरह, हर रूप में उसको पा सकता है। भगवान को रिझाने के लिए बालक की तरह छल कपट रहित बन जाओ और रिझाओ फिर भगवान को पाना बहुत आसान हो जाता है।
गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहा कि इंद्र को अभिमान हो गया कि वह बृज में अपनी शक्ति से हाहाकार मचा सकता है, इस अभिमान को श्रीकृष्ण ने पलभर में गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर चूर कर दिया। सात दिन तक वह गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाए रहे और इंद्र के अभिमान को चूर किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को भी अपने अभिमान से बचना चाहिए। इसके बाद छप्पन भोग लगा। इस दौरान मुख्य यजमान सुनील गुप्ता, अनीता गुप्ता, संजीव गुप्ता, गीता गुप्ता, बेबी गुप्ता, यतेंद्र गुप्ता आदि मौजूद रहे।