शनिवार सायं हुई आधा घंटे की बारिश से शहर में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। वहीं गल्ला मंडी में खुले में रखा हजारों क्विंटल अनाज भीगकर खराब होने की कगार पर पहुंच गया। रविवार को व्यापारी पूरे दिन मंडी परिसर में अनाज सूखाते नजर आए।
गौरतलब हो कि शनिवार की शाम आधा घंटे की झमाझम बारिश में गल्ला मंडी में खुले में रखी करीब पांच हजार क्विंटल मक्का भीग गई, जिससे गल्ला व्यापारियों और किसानों की पेशानी पर बल पड़ गए। गल्ला कारोबारियों में इस बात पर अक्रोश देखा गया कि मंडी में सफाई के लिए ठेका उठाया जाता है, लेकिन गल्ला मंडी में स्थित नाले-नालियों की सफाई कभी नहीं होती। वहीं, गल्ला मंडी में अनाज की आवक को देखते हुए अनाज की नीलामी के स्थान का भी अभाव है। मंडी की सड़कों में खुले में ही हजारों क्विंटल अनाज पड़ा रहता है। शनिवार को मंडी में छह हजार क्विंटल मक्का और 500 क्विंटल गेहूं की आवक भी हुई थी।
दूसरी ओर नाले-नालियों की तली झाड़ सफाई का दावा करने वाली नगर पालिका की सच्चाई पहली बारिश में सामने आ गई। पानी की निकासी नहीं होने के कारण शहर के ज्यादातर क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। वहीं गंगेश्वर कालोनी में तो लोगों के घरों में भी बारिश का पानी घुस गया, जिससे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोग रविवार को भी घरों से बारिश का पानी निकालने में जुटे रहे। वहीं गोशाला के समीप और चित्रगुप्त कालोनी में नाले की दीवार ढह गई।
बारिश से उनकी 20 क्विंटल मक्का भीग गई। मक्का दुकान के बाहर खुले में थी। उन्होंने कहा कि यदि जलभराव नहीं होता तो इतना नुकसान नहीं होता।
राकेश गुप्ता, कारोबारी
सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन सफाई नहीं होती है। मेरी दुकान पर भी 75 क्विंटल मक्का भीग गई।
मदनलाल, कारोबारी