पति-पत्नी के बीच ‘वो’ के चक्कर से रिश्ते दरक रहे हैं। साथ ही नशाखोरी और बेरोजागारी भी रिश्तों के टूटने का कारण बन रहे हैं। जी हां, ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि यह खुलासा परिवार परामर्श केेंद्र में आए मामलों से हुआ। यहां आए मामलों में से 70 फीसदी अवैध संबंधों के हैं। केंद्र के सदस्य काउंसलिंग कर मामलों का निस्तारण करने में जुटे रहते हैं।
प्रत्येक रविवार को जिले के महिला थाना में आयोजित परिवार परामर्श केंद्र में महिला उत्पीड़न और रिश्तों को संजोने के मामलों की सुनवाई की जाती है। इन मामलों में पति और पत्नी को बुलाकर काउंसलिंग की जाती है और उन्हें साथ रहने के लिए प्रेरित किया जाता है। केंद्र में पहुंचने वाले अधिकतर मामले अवैध संबंधों के हैं जिनसे परिवार में बिखराव की स्थिति पैदा हो रही है।
वहीं अधिकारियों के रुचि नहीं लेने से परिवार परामर्श केंद्र का महत्व कम हो चला है। रविवार को केंद्र में 20 मामलों में सुनवाई की जानी थी, लेकिन महज दो ही मामले निस्तारित हुए।
केंद्र के सदस्य बताते हैं कि 2004 में केंद्र की शुरुआत के समय तत्कालीन एसएसपी लक्ष्मीशंकर ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए थे। इसके बाद आने वाली शिकायतों को वरिष्ठ अधिकारियों की सहायता से निपटा दिया जाता था मगर अब अधिकारी ने इन मामलों के निस्तारण में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
केंद्र की सदस्या डा. श्यामलता वेद बताती हैं कि केंद्र के पास अवैध संबंधों के मामले सबसे ज्यादा आते हैं। ऐसे मामलों को डील करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग जरूरी है।
महिला थाना प्रभारी सुमन लता जैन कहती हैं कि परिवार परामर्श केंद्र में हर सप्ताह सुलह-समझौते कराए जाते हैं। केंद्र में काउंसलर्स की भूमिका में सपना यादव, सिस्टर रोज एंट्रो, गीता शर्मा, संजीव तिवारी मौजूद रहे।