बस स्टैंड पर कचरे से अटा पड़ा खुला नाला। संवाद
एटा। गंदगी और पॉलीथिन से अटा पड़ा खुला हुआ खुला नाला सड़क जैसा ही दिखाई दे रहा है। नगर पालिका प्रशासन की इस अनदेखी का शिकार रविवार को चार साल का मासूम हो गया। वह नाले को जमीन समझकर लघुशंका के लिए खड़ा हुआ तो डूबने लगा। उसकी मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोगों ने बच्चे को किसी तरह बाहर खींचा। इस तरह मासूम की किसी तरह जान बच पाई।
शहर में खुले नाले लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। पालिका प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि ज्यादातर नाले सफाई नहीं होने के कारण ऊपर तक बजबजा रहे हैं। कूड़ा और पॉलिथीन इतना कि दिन में भी लोगों को मृग मरीचिका की तरह नाले की जगह कूड़ाघर दिखाई दे रहा है। इसी तरह के नाले में फंस गई चार साल के अंकित की जिंदगी। सुमन नामक महिला यात्री अलीगढ़ की ओर से जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थीं, तभी उनका चार साल का बेटा अंकित खेलते-खेलते बस स्टैंड की ओर जाने लगा सामने गंदगी से अटे नाले को जमीन समझते हुए आगे बढ़ा और नाले में डूबने लगा। मां ने पकड़ने का प्रयास किया तब तक पूरी तरह नाले के अंदर चला गया। मां रोने-बिलखने लगी तो बच्चा डूबता देख पास खड़े लोगों ने बच्चे को किसी तरह ऊपर खींच लिया। मां ने बच्चे का कलेजे से लगाया और बिलख-बिलख कर रोने लगी। लोगों केे समझाने के बाद वह शांत हुई और बच्चे को वहां लगे हैंडपंप पर ले जाकर नहलाया। पालिका प्रशासन की इस अनदेखी पर दुकानदार राहुल का कहना था कि नाले में कई पशु भी गिर चुके हैं, लेकिन इस नाले की बरसों से सफाई नहीं कराई गई है। कई बार रात्रि में अंधेरा होने पर यात्री भी नाले में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। इस ओर पालिका प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। संभवत: पालिका प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है। यात्री रामप्रवेश का कहना था कि इस नाले के चारों ओर बाउंड्रीवाल कराई जाए अथवा संकेतक बोर्ड लगाए जाएं
बस स्टैंड पर कचरे से अटा पड़ा खुला नाला। संवाद