एटा। सत्संग हादसा होने के बाद मेडिकल कॉलेज में शवों के पहुंचने पर काफी भीड़ जुट गई। पुलिस और प्रशासनिक अमला भी जमा हो गया। भीड़ अधिक होने के चलते पुलिस अधिकारियों को कार्य करने में असहजता होने लगी। इसके बाद खुले में मेजें डालकर वैकल्पिक दफ्तर बनाया गया। जहां पंचनामा भरे गए और पोस्टमार्टम के लिए दस्तावेज तैयार कराए गए।
मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम हाउस और आसपास भारी भीड़ का जमावड़ा हो गया। इसके चलते पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को भी कार्य करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ गया। इसके बाद टेंट से मेजें मंगाई गई और कई इंस्पेक्टर रेंक के कर्मियों को लगाकर पोस्टमार्टम के लिए दस्तावेज तैयार कराए गए। पुलिस अधिकारियों को लाउडस्पीकर पर कमान संभालनी पड़ी और व्यवस्थाओं को बनाए रखने की बार-बार अपील की जाती रही। इसके बाद एक-एक मृतक के परिजन को बुलाकर दस्तावेजों को तैयार कराने में सहयोग लिया गया और प्रक्रिया चलती रहीं।
वहीं मोर्चरी में रखे शवों की पहचान कराने के लिए एक-एक व्यक्ति को अंदर भेजा गया। उसके साथ पोस्टमार्टम पर तैनात कर्मचारियों के साथ भेजा गया ताकि किसी भी तरह के परिजन को घबराहट अथवा बेचैनी होती है तो संभाला जा सके। बड़ी संख्या में शवों को देखकर कुछ लोग विचलित भी होते रहे। इसके चलते पुलिस ने एक बार में एक ही व्यक्ति को शव की पहचान करने के लिए अंदर भेजने का निर्णय लिया।
नहीं मिले शव तो फिर लौटे हाथरस
तमाम लोग ऐसे भी पहुंचे जिन्हें घटनास्थल पर सूचना दी गई थी कि मृतकों को एटा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया है। इस सूचना के आधार पर अपनों की तलाश में परिजन यहां पहुंच गए। जब पोस्टमार्टम हाउस के अंदर पहचान के लिए गए तो लाशों में कोई अपना नहीं मिला। इस पर बाहर आ गए और पुलिस व अन्य अधिकारियों को बताया। ऐसे लोगों को वापस हाथरस जाना पड़ा।