एटा। नए शैक्षिक सत्र शुरू होते ही अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है। किताबों से लेकर यूनीफाॅर्म, जूते-मौजे भी महंगे हो गए हैं। कमीशखोरी के चलते यह सामान निर्धारित दुकानों पर ही मिल रही है, जो सामान्य दुकानों की अपेक्षा काफी महंगा है। इससे अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ गया है।निजी विद्यालयों में बच्चों को किताबों-कॉपियों से लेकर यूनीफाॅर्म व जूते-मौजे भी निर्धारित दुकानों से खरीदने को कहा जा रहा है। पूरा खेल पहले से सेट है। हर चीज पर कमीशन तय है। यही कारण है निजी स्कूलों की यूनीफार्म, जूते-मौजे निर्धारित दुकानों पर ही मिलते हैं। अभिभावक स्कूल द्वारा बताई गई दुकान पर पहुंचते हैं और स्कूल का नाम बताते हैं। दुकानदार यूनीफार्म सहित अन्य सामान उनको दे देता है। इसकी मोटी कीमत वसूली जाती है और किसी प्रकार की कोई छूट नहीं है। इस गोरखधंधे से अभिभावक काफी परेशान हैं।
बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष यूनीफाॅर्म की कीमत में दस फीसदी इजाफा हुआ है। शहर के एक निजी स्कूल की कक्षा एक के बच्चे की यूनीफाॅर्म की कीमत 350 से बढ़कर 380 पर जा पहुंची है। वहीं जूते 150 से बढ़कर 170 पर हैं। बीते वर्ष एक जोड़ी मौजे की कीमत 30 रुपये थी अब यह 32 रुपये के हो गए हैं।