एटा। वर्ष 1993 में विधानसभा चुनाव के मतदान के दौरान पोलिंग एजेंट की गोली मारकर हत्या की गई थी। घटना के करीब 31 साल बाद अदालत का फैसला आया। इसमें तीनों आरोपियों को दोषमुक्त किया गया है। अभियोजन पक्ष इनके खिलाफ आरोपों को साबित नहीं करा सका।
यह घटना प्रदेश स्तर तक सुर्खियों में रही थी। इसकी विवेचना सीबीसीआईडी से भी कराई गई। घटना 21 नवंबर 2023 को विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के तहत चल रहे मतदान के दिन भरगैर क्षेत्र की है। उस समय यह इलाका राजा का रामपुर थाना क्षेत्र में आता था। रिपाेर्ट इकबाल हसन ने दर्ज कराया। बताया कि मैं कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र सिंह यादव और, मेरे बेटे मंजूर आलम का दामाद तुफैल अहमद निर्दलीय प्रत्याशी कालीचरन का एजेंट था।
सुबह करीब 9 बजे मतदान केंद्र चकपहाड़ा प्राइमरी पाठशाला पर वोटिंग चल रही थी। तभी नत्थूू, उसका भाई कल्लू और नवाब आलम निवासी नत्थू थाक कस्बा भरगैर फर्जी वोट डालने की कोशिश करने लगे। इस पर तुफैल का विवाद हो गया। इसके बाद विद्यालय के पीछे जाकर जंगले से तमंचे से फायर कर दिया। गोली तुफैल को लगी और वह मर गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 9 गवाह पेश किए गए। इनमें से सभी मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए। जिन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। सरकारी सेवकों की गवाही आरोप साबित करने के लिए नाकाफी थी। अपर सत्र न्यायाधीश शशि भूषण कुमार शांडिल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष कथानक को संदेह से परे प्रमाणित करन में असफल रहा है। संदेह का लाभ देकर तीनों को दोषमुक्त करार दिया। इनमें से नत्थू और कल्लू जमानत पर हैं, जबकि नवाब आलम जिला कारागार में निरुद्ध है।