एटा। दिवाली पर हुई आतिशबाजी ने जिले में सांस रोगियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारूद के साथ तमाम खतरनाक रसायन के हवा में घुलने से पर्यावरण प्रदूषित हो गया है। इसका असर सेहत पर पड़ना शुरू हो गया। पिछले दो दिन में आठ मरीज मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में सांस की परेशानी के भर्ती हुए हैं। वहीं ओपीडी में भी प्रदूषण के चलते सांस लेने में परेशानी के साथ आंखों में जलन होने के मरीज भी बढ़ गए। मंगलवार को 55 मरीज सांस रोग से ग्रसित पहुंचे।
दिवाली के बाद मंगलवार को सुबह से ही मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ लगना शुरू हो गई। प्रतिदिन के सापेक्ष मंगलवार को भी कॉलेज में मरीज नहीं पहुंचे, लेकिन फिर भी कॉलेज में पर्चा काउंटर पर 620 मरीजाें के पर्चे बने। फिजीशियन कक्ष में डॉ. आदर्श द्वारा मरीजों को देखा जा रहा था। उन्होंने बताया प्रदूषण के कारण सांस के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। दिवाली से पहले 30 से 35 मरीज उनके पास पहुंचते थे। जबकि मंगलवार को 55 मरीज सांस के रोग के पहुंचे।
वहीं आंखों में जलन की शिकायत लेकर 15 से 20 मरीज नेत्र विभाग में पहुंचे। जबकि कॉलेज की इमरजेंसी में दो दिन में आठ मरीजों को सांस की समस्या के चलते भर्ती किया गया। चिकित्सक चेतन चौहान ने बताया कि सांस रोगियों और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी बढ़ गई है। लोगों को मास्क पहनने और अनावश्यक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। आतिशबाजी से प्रदूषण बढ़ा है। इससे दिक्कत और बढ़ गई है।