एटा। विधि व्यवसाय (वकालत) करने के प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए अधिवक्ताओं को अपने सीओपी फॉर्म 25 अक्तूबर तक कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन कार्यालय में जमा करने होंगे। बृहस्पतिवार को बार पदाधिकारियों ने अधिसूचना जारी की।
विधि व्यवसाय कर रहे अधिवक्ताओं और महज पंजीकृत अधिवक्ताओं के मध्य अंतर को साफ करने के लिए बनाई गई प्रैक्टिस के प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में अब फिर से नवीनीकरण की कवायद शुरू हो गई। इस बार अधिवक्ताओं को अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का भी खुलासा करना होगा। बताते चलें कि पूर्व में बनाई गई इस प्रक्रिया में बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश के चेयरमैन की हैसियत से उत्तर प्रदेश शासन के एडवोकेट जनरल राघवेंद्र सिंह के हस्ताक्षर से परिचय पत्र एवं अन्य पदाधिकारियों के सम्मिलित हस्ताक्षर से प्रमाणपत्र जारी किए गए। जो 1 जनवरी 2018 से 5 साल के लिए वैध करार दिए गए। जिनकी वैधता 31 दिसंबर 2022 तक थी। इस मामले में अब फिर से इन प्रमाणपत्रों व परिचयपत्रों के नवीनीकरण की कार्यवाही आरंभ हो गई है।
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिकरवार एवं महासचिव गिरीश चंद्र शर्मा ने बताया कि अधिवक्ताओं को अपने प्रमाणपत्रों के नवीनीकरण के लिए वर्ष 2018 से 2023 तक प्रत्येक साल के अदालत में पेश किए वकालतनामे की सत्यापित प्रति दाखिल करनी होगी। जिसमें 2021 के कोरोना काल की छूट रहेगी। पदाधिकारियों ने बताया कि अधिवक्ताओं को अपने खिलाफ दर्ज चल रहे आपराधिक मामलों की जानकारी भी देनी होगी। उन्होंने सभी अधिवक्ताओं से 25 अक्टूबर तक बार कार्यालय में आवेदन जमा करने की अपील की, ताकि प्रमाणपत्र बनने के लिए बार काउंसिल को भेजा जा सके।