बारह पत्थर मैदान पर चल रहे कासगंज महोत्सव में सोमवार रात को ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह, उत्तर प्रदेश नियंत्रण बोर्ड महिला एवं बाल विकास के चेयरमैन मोहम्मद कमर आलम व अन्य अतिथि अधिकारियों ने किया। मां सरस्वती का दीप प्रज्ज्वन सपा जिलाध्यक्ष एटा अशरफ हुसैन ने किया।
मुशायरे के शुरूआती दौर में शायर अल्ताफ जियां ने ‘आओ तिरंगे पर कर दें हम तन मन कुर्बान, सजा दो हिंदुस्तान, भगत सिंह ने हंसकर दे दी जान सजा दो हिंदुस्तान।’ दिल्ली की शायरा शरफ नान पारवी ने कहा कि ‘हमारी मौत को तुम हादसे का नाम देते हो, मगर दुनिया के अखबारों में कत्लेआम लिखा है।’ कानपुर की शायरा शबीना हदीम ने कहा कि ‘दिए मुढ़ेरों पर रख रहीं हूं, जमी पर कलिया बिछा रही हूं, जो अपने हिस्से की रोटी बांट देता है उसका रिस्क कभी कम नहीं होता।’ शायर नईम अख्तर खाद ने कहा कि ‘जरा सा जोश दरिया में क्या आया वह अपनी खुद बढ़ाई कर रहा है।’ जोहर कानपुरी ने अपने कलाम में कहा कि जो ‘फसाद के शोलों को हवा देती है। ऐसे हाथों में हुकूमत नहीं देखी जाती।’ भोपाल की शायरा डा. नुसरत मेंहदी ने कहा कि ‘कतराते जिंदगी से क्या करूं, पछवाईयों से घबराकर मरजाऊ यां क्या करूं।’ मशहूर शायर बसीम बरेलवी ने कहा कि नफरत के साथ भीड़ है, नारा है जोश है, में बात कर रहा हूं मोहब्बत की, तन्हा, हूं जिंदा हूं।‘ आगरा के शायर अनवर अमान ने कहा कि मां का दिल देखकर जब मचलने लगा आसमां अपनी गर्दिश बदलने लगा।’ मुशायरे में मशहूर शायर बसीम बरेलवी को डा. लायक अली, चौधरी नरूल हसन, इंजीनियर अब्दुल रब, असरार सैफी ने चांदी का मुकुट, शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में अतिथियों व अन्य लोगों का स्वागत भी आयोजक मंडल ने किया।