एटा/मारहरा। जिले में अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के लिए बनवाए गए तीन छात्रावासों पर बाहरी लोगों का कब्जा है। किसी में विभाग का स्टाफ तो किसी में ओबीसी एवं सामान्य वर्ग के छात्र रह रहे हैं। अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को परेशानी हो रही है। उन्होंने डीएम से इन छात्रावासों को खाली कराए जाने की मांग की है।
शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2014-15 में अनुसूचित जाति की छात्राओं को हॉस्टल सुविधा के लिए भले ही 10 करोड़ के बजट की व्यवस्था की गई है, लेकिन पूर्व में बनवाए गए हॉस्टलों में भी अनुसूचित जाति के छात्रों को यह सुविधा प्रदान नहीं कराई जा रही है। अनुसूचित जाति के तेजेंद्र सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, राहुल कुमार, आकांक्षा एवं ओमश्री ने बताया कि वह बीएससी एवं बीपीई पाठ्यक्रमों की शिक्षा एटा मुख्यालय पर रहकर कर रहे हैं। अनुसूचित जाति के लिए बनवाए गए छात्रावासों में रहने के लिए वह समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अलावा प्रभारी अधीक्षक से भी अनुरोध कर चुके हैं। दो वर्षों से छात्रावास सुविधा के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनको इस सुविधा का लाभ नहीं मिला है। छात्रावासों में कर्मचारी, शिक्षक-शिक्षिकाओं के अलावा सामान्य एवं पिछड़ी जाति के छात्र रह रहे हैं। बता दें कि अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए जीआईसी कैंपस एवं जेएलएन डिग्री कालेज कैंपस के अलावा छात्राओं के लिए जीजीआईसी कैंपस में छात्रावास बनवाए गए हैं, जिनमें अनाधिकृत रूप से दूसरों का कब्जा है। अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को इस सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है।
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गत वर्षों में क्या रहा उन्हें जानकारी नहीं है। इस वित्तीय वर्ष में अनाधिकृत रूप से रह रहे लोगों से छात्रावास खाली करा लिया जाएगा। इच्छुक छात्र-छात्राओं को ये सुविधा दिलाई जाएगी।
-विनोद शंकर तिवारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, एटा।