एटा। रसोई गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था चरमरा गई है। तीन गुने रेट पर सिलेंडर मिलने की वजह से कई स्कूलों में तो मिड डे मील बंद हो गया है। अधिकांश प्रधानाध्यापकों का कहना है कि पुरानी लागत मूल्य पर भोजन बनवाना मुश्किल हो रहा है।
पुरानी कनवर्जन कास्ट पर मध्याह्न भोजन बनाना मुश्किल हो रहा है। चार सौ रुपये के सिलेंडर की कीमत तीन गुनी होने पर व्यवस्थाएं ध्वस्त हो रही हैं। हजारों निर्धन और पात्र स्कूली बच्चे इस योजना से वंचित हो रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक की बैठकों में रसोई गैस महंगाई का मुद्दा छाया रहा। प्रधानाचार्यों ने ऐसी स्थिति में मिड डे मील की व्यवस्था करने में लाचारी भी दिखाई है। महारानी लक्ष्मीबाई बालिका इंटर कालेज की प्रधानाचार्य डा. विनीता तिवारी कहती हैं कि पुरानी कनवर्जन कॉस्ट में महंगे गैस सिलेंडर को मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। वैसे भी उनके यहां लागत मूल्य ही नहीं बचा है। मार्च माह के बाद विभाग से कनवर्जन कॉस्ट ही नहीं मिली है।
रोहन लाल चतुर्वेदी सर्वोदय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य राघव आमौरिया कहते हैं कि गैस सिलेंडर की महंगाई व्यवस्थाओं पर भारी पड़ रही है। इतने महंगे सिलेंडर से खाना बनवाना संभव नहीं हो रहा। वे बताते हैं कि गैस एजेंसी ने पूर्व के सस्ती दर के सिलेंडर पर भी अधिक मूल्य बताकर अंतर जमा करने के लिए पत्र भेजा है। सकीट स्थित डीएवी इंटर कालेज के प्रधानाचार्य अनोखे सिंह यादव का कहना है कि धन के अभाव में व्यवस्था ठप है। विद्यालय के 443 छात्र-छात्राओं के भोजन के लिए गैस का बजट बढ़ गया है। वे बताते हैं कि पूर्व में चार सौ रुपये का मिलने वाला एक सिलेंडर अब 1250 रुपये का खरीदना पड़ रहा है।
डीएवी इंटर कालेज अलीगंज के प्रधानाचार्य डा.होम सिंह कुशवाहा बताते हैं कि जुलाई से कनवर्जन कॉस्ट नहीं मिली है। ऐसे में जेब से पैसा लगाकर खानापूरी की जा रही है।
सर्वोदय इंटर कालेज के मध्यान्ह भोजन प्रभारी आलोक शर्मा कहते हैं कि कनवर्जन कॉस्ट में निर्धारित चालीस पैसा ईंधन मूल्य से अधिक बच्चों का भोजन तो संभव है, लेकिन पचास से कम बच्चों के लिए यह लागत इससे दो गुनी आती है।