एटा। जिला पंचायत अध्यक्ष पर लगे गैंगरेप के आरोप के बाद सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। समर्थक सकते में हैं। वहीं विरोधी ऐेसी घटनाओं को पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बता रहे हैं। फिलहाल लोगों की निगाहें महिला आयोग एवं पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं।
अपराधों को लेकर चर्चाओं में रहने वाला जनपद एक बार फिर दुराचार के आरोप के साथ सुर्खियाें में आ गया है। बताते चलें कि लगभग सवा वर्ष पहले का यह प्रकरण उस समय सुर्खियों में आ गया जब पीड़िता ने महिला आयोग में शिकायत दर्ज करा जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव पर भी बलात्कार का आरोप लगाया। पुलिस के अनुसार मई 2011 में गायब हुई इस लड़की के परिजनों ने तीन नामजदों पर अपहरण का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। इसके बाद मामले की जांच तत्कालीन एसएसपी मोहित गुप्ता ने थानाध्यक्ष जैथरा एवं एसओजी प्रभारी से कराई थी। जांच टीम ने सर्विलांस पर मोबाइल लगाकर उक्त लड़की को बरामद कर लिया था।
जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव ने इसे पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह की घटिया साजिश बताते हुए कहा कि जनता का विश्वास खो चुके लोग अब चरित्र हनन पर उतर आए हैं। मामले की सत्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तथाकथित पीड़िता द्वारा कोर्ट में दिए गए शपथपत्र में नेमसिंह, रामौतार को आरोपी बताया था वहीं महिला आयोग के शपथपत्र में नए नाम जोड़कर खुद को ही संदिग्ध कर दिया है।
पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह यादव ने कहा कि पीड़िता के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव उस पर मंत्री पुत्र रणजीत व मनोज को फंसाने के लिए दबाव बना रहे थे। लेकिन वे नाकाम रहे। सच्चाई सामने आने पर वे बौखला रहे हैं। महीनों पूर्व हुई शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा वांछित कार्रवाई न होने को उन्होंने प्रशासन की सत्यनिष्ठा पर प्रशभनचिन्ह बताया।
इधर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय मोहन शर्मा ने कहा कि इस संबंध में उनके पास कोई भी सूचना एवं निर्देश नहीं आया है। वह फिलहाल मीटिंग में आगरा हैं।