फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Etah News: 700 बीमार, 6 माह में कुल 186 कुपोषितों को मिला उपचार

Sun, 27 Oct 2024 06:39 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
विज्ञापन
विज्ञापन
एटा। जिलेभर में करीब 700 बच्चे ऐसे हैं जो गंभीर रूप से कुपोषित हैं। इनका पोषण पुनर्वास केंद्र में उपचार होना चाहिए, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते 6 माह में कुल 186 बच्चों का ही यहां उपचार हुआ है। अधिकांश दिनों में बेड खाली ही रहते हैं।
विज्ञापन

कुपोषण को मिटाने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। भोजन से लेकर बच्चे को मुफ्त उपचार दिया जा रहा है। पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चे के भर्ती रहने के दौरान उसकी मां को भी धनराशि दी जाती है। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज में बने एनआरसी वार्ड में बेड खाली रहते हैं। कुपोषण से ग्रसित बच्चों की देखभाल से लेकर मॉनीटरिंग करने सहित बच्चे को एनआरसी वार्ड में भर्ती कराने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं की है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमें भी सहयोग करती हैं। केंद्र पर 6 माह से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चे भर्ती किए जाते हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर कुपोषित बच्चों का पूरा विवरण रहता है। टीके के साथ ही पौष्टिक आहार तक की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की होती है। जिससे बच्चों की सेहत अच्छी रहे। अगर कोई बच्चा उम्र के हिसाब से कमजोर है और जांच में कुपोषित या अति कुपोषित आता है तो उसकी सेहत सुधारने के लिए आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जांच कराती हैं। अति कुपोषित होने पर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में बने एनआरसी में 14 दिन तक भर्ती कराए जाने का प्रावधान है।
विज्ञापन

केंद्र पर उनकी नियमित जांच, वजन कर पौष्टिक आहार दिया जाता है। इस काम में आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमों की भी जिम्मेदारी होती है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता बच्चों को कुपोषित से पोषित होने में बाधा बन रही है। आलम यह है कि 10 बेड के वार्ड में 1 अप्रैल से 20 अक्तूबर तक कुल 186 बच्चों को उपचार मिला है। इन दिनों यहां दो बच्चे भर्ती हैं। बाकी के बेड खाली पड़े हैं।

भर्ती कराने वाले कर्मी सहित मां को मिलती है धनराशि


पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों के रहने, खाने के साथ ही उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जाती है। एंबुलेंस से लाने और ले जाने की सुविधा है। अगर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लाती हैं तो उन्हें भी भत्ता दिया जाता है। इसके अलावा बच्चे की मां को प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जाता है।

एनआरसी में कुपोषित बच्चे कम पहुंच रहे हैं। इसके लिए डीपीओ से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देशित करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा ब्लॉकों पर तैनात टीमों, एएनएम व आशाओं को निर्देश दिए हैं कि अति कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराएं। -डॉ. उमेश त्रिपाठी, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें