परिवहन निगम को प्रतिदिन औसतन 14 लाख की आय देने वाला स्थानीय रोडवेज के पास बसों का टोटा है। इतनी कमाई के बावजूद स्थानीय डिपो को बीते दो सालों में निगम की ओर से दो नई बसें ही मिली हैं। इसके अलावा बदहाल मार्गों की वजह से निगम की करीब 50 प्रतिशत बसें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जो वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं। ऐसे में विभाग अनुबंधित बसों के सहारे यात्रियों को जैसे-तैसे सुविधाएं दे पा रहा है। इन हालातों में दीपावली पर्व पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं कैसे मिलेंगी।
विभाग की मानें तो निगम और अनुबंधित बसों को मिलाकर स्थानीय रोडवेज के पास 143 बस हैं। जिनके सहारे वह दीपावली पर यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की बात कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि बदहाल मार्गों ने निगम की 109 बसों की हालत खराब कर दी है। वर्कशॉप के कर्मचारियों की मानें तो आधी से ज्यादा बसें तो वर्कशॉप में हर दिन मरम्मत के लिए खड़ी रहती हैं। पर्व को लेकर विभाग बसों के लिए जरूरत का सामान भी मंगा रहा है।