एटा। पराली जलाने वाली घटनाओं की सैटेलाइट से निगरानी की जा रही है। इस तरह के सात मामले पकड़ में आए हैं। जिस पर संबंधित किसानों पर 32500 रुपये जुर्माना लगाया गया है।
डीएम के निर्देश पर अधिकारियों, कर्मचारियाें ने ग्रामीण क्षेत्रों का निरीक्षण किया। पराली जलाने पर ग्राम नूंहखास तहसील जलेसर के अनिल कुमार, अरविंद कुमार, अरुण कुमार, अतुल कुमार, अमित कुमार पर 25000 रुपये, साबिर पर 2500 रुपये एवं अंतराम निवासी इब्राहिमपुर नगरिया तहसील एटा पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसकी वसूली राजस्व विभाग द्वारा की जाएगी।
डीएम प्रेम रंजन सिंह ने सभी एसडीएम, बीडीओ, डीडी कृषि को निर्देश दिए हैं कि पराली जलाने की घटनाओं को गंभीरता से लें। किसानों को पराली न जलाने एवं पराली का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित करें। सभी लेखपाल, सचिव प्रधान की उपस्थिति में किसानों के साथ बैठक करें। किसानों को बताया जाए कि पराली या फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है।
साथ ही पर्यावरण भी दूषित होता है। खेतों में फसल अवशेष मिलाने से कहीं ज्यादा लाभ ले सकते हैं। डीडी कृषि रोताश कुमार ने बताया कि किसान पराली को मिट्टी पलटने वाले हल से खेत में पलटकर रोटावेटर चलाकर बुवाई कार्य कर सकते है। बगैर पलटे भी सुपर सीडर से बुवाई कर सकते हैं। डीकंपोजर, यूरिया का प्रयोग कर फसल अवशेष को खेत में शीघ्र सड़ा सकते हैं, जो कि खाद के रूप में कार्य करता है।