एटा। चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है, लेकिन शासन ने प्रस्तावित जिला योजना का अब तक 25 प्रतिशत धन भी जिले में नहीं भेजा है। यह हाल इसी वित्तीय वर्ष का नहीं है। पिछले वित्तीय वर्ष में भी जिला योजना को पूरी धनराशि नसीब नहीं हुई थी। अब जबकि वित्तीय वर्ष समापन की ओर है तो विभाग एक बार फिर जिला योजना के लिए प्रस्ताव तैयार करने की तैयारियों में जुट जाएंगे।
शासन द्वारा समय से बजट न मिलने पर जिला योजना बेअसर होती जा रही है। यह हाल तब है कि जब जिला के प्रभारी मंत्री सूबे के सबसे कद्दावर मंत्री हैं। इसके बावजूद प्रस्तावित योजनाओं को बजट के लाले पड़ रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 90 करोड़ 97 लाख की योजनाएं प्रस्तावित थीं। इसमें से विभाग को अब तक 18 करोड़ 31 लाख 95 हजार रुपये ही मिल सके हैं। शासन की उपेक्षा की हद तो देखिए पिछले वित्तीय वर्ष में भी पूरा बजट उपलब्ध नहीं हो पाया। जिला अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग पिछले वित्तीय वर्ष के जिला योजना के आंकड़े तो नहीं बता पाया, लेकिन उसके अनुसार यह सच है कि पिछले वित्तीय वर्ष में जिला योजना के तहत विभाग को पूरा बजट नहीं मिल पाया था।
अब तक इन कार्यों को मिला बजट
एटा। नि:शुल्क बोरिंग को 85.54 लाख, पशुपालन को 15.70 लाख, दुग्ध उत्पादन को 36.76 लाख, वन विभाग को 15.69 लाख, एनआरएम को 37.78 लाख, रोजगार कार्यक्रम को एक करोड़ 73 लाख, मध्यम एवं गहरी बोरिंग को 93.72 लाख, सड़कों को चार करोड़ 98 लाख, बेसिक शिक्षा को 12.51 लाख, माध्यमिक शिक्षा एक करोड़ 17 लाख, आवास के लिए 64.92 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है।
जिला योजना के तहत अब तक लगभग 18 करोड़ की धनराशि संबंधित विभागों को प्राप्त हो चुकी है। बची हुई धनराशि के भी जल्द आने की उम्मीद है।
- एके दीक्षित, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी