मलावन में प्रस्तावित 1320 मेगावॉट जवाहर तापीय परियोजना पर संकट और गहराता जा रहा है। अधीक्षण अभियंता से दो चरण की वार्ता असफल होने पर सोमवार शाम लखनऊ से विद्युत निगम के निदेशक से मैनपुरी में हुई किसानों से तीसरे दौर की वार्ता भी बेनजीता रही। निदेशक मंगलवार को एटा में किसानों से चौथे दौर की वार्ता करेंगे। किसान वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा और प्रोजेक्ट में किसानों के बच्चों को नौकरी देने की मांग पर अड़े हैं। उत्पादन निगम अफसरों ने पिछले सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा ब्याज समेत देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन किसानो ने नाकार दिया। ऐसे में परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से प्रदूषण क्लियरेंस दिलाने में हाईकोर्ट का स्टे बाधा बन गया है। अब अफसर किसानों पर 29 अगस्त को होने वाली प्रदूषण क्लियरेंस सुनवाई से पहले केस वापस लेने का दवाब बनाने में जुटे हैं।
सकीट ब्लॉक क्षेत्र के मलावन में प्रस्तावित 1320 मेगावॉट की जवाहर तापीय परियोजना के लिए विद्युत उत्पादन निगम ने पांच गावों के 1550 किसानों की 350 हेक्टयर भूमि अधिग्रहित की है। 113 किसानों की 13 हेक्टेयर भूमि को छोड़ कर बाकी के किसानों को मुआवजा मिल चुका है। निगोह निवासी किसान रामपाल सिंह के नेतृत्व में किसानों ने वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। याचिका पर प्रदेश सरकार का जवाब नहीं दाखिल होने पर हाईकोर्ट ने बाउंड्रीबॉल निर्माण पर रोक लगाई तो प्रदूषण क्लियंरेंस अधर में लटक गया। तब जाकर विद्युत उत्पादन निगम के अफसरों के कान खड़े हुए। अधीक्षण अभियंता पीके गुप्ता से दो दौर की किसानों से वार्ता विफल होने के बाद सोमवार शाम लखनऊ से विद्युत त्पादन निगम के निदेशक राकेश त्रिवेदी वार्ता करने पहुंचे। निदेशक ने एटा के किसानों को मैनपुरी स्थित निगम के विशष्टि अतिथि ग्रह बुला कर तीसरे दौर की वार्ता की, लेकिन किसान वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा और परियोजना में किसानों के बच्चों को नौकरी देने की मांग पर अड़े रहे। इसके चलते तीसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। मंगलवार को निगम के निदेशक किसानों से चौथे दौर की वार्ता एटा में करेंगे।
सोमवार शाम मुआवजे को लेकर विद्युत उत्पादन निगम के निदेशक राकेश त्रिपाठी किसानों से वार्ता करेंगे। निगम पिछले सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा ब्याज समेत देने पर सहमत है। लेकिन किसान वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मांग रहे हैं। ऐसे में निगम के पास दो रास्ते बचे हैं। पहला प्रदूषण क्लियरेंस नहीं मिलने पर किसानों की भूमि वापस कर प्रोजेक्ट निरस्त करे। दूसरा जिन 4 प्रतिशत भूमि का किसानों से करार नहीं हुआ है। उनकी भूमि छोड़ कर बाकी की अधिग्रहित भूमि पर परियोजना लगाने का काम शुरु करे।
प्रस्तावित जवाहर तापीय परियोजना निरस्त होने पर किसानों को आर्थिक और व्यापारिक क्षेत्र में बड़ा नुकसान होगा। इलाके में भूमि के रेट नहीं बढ़ने के साथ बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिलेगा। जबकि परियोजना लगने से शिक्षित और गैर शिक्षित बेरोजगारों को बिना वीरयता के भी रोजगार मिलेगा। यदि परियोजना निरस्त हुई तो रोजगार के अवसर गवाने के साथ भविष्य में दूसरी कंपनियां प्रोजेक्ट लगाने से बचेंगी। जबकि प्रोजेक्ट लगने से रियल स्टेट समेत नया बजार डवलप होने से मुआवजे से हो रहा आर्थिक घाटा पूरा हो सकता है।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले किसान निगोह निवासी रामपाल सिंह चौहान, जिपं सदस्य राम निवास, इंटक जिला अध्यक्ष यशपाल सिंह चौहान, भाकियू तहसील अध्यक्ष राम अवतार, धर्मेद्र सिंह चौहान ने कहा मुआवजे पर वार्ता निदेशक, एमडी और चेयरमैन स्तर से होनी चाहिए। ताकि वार्ता के दौरान फैसले पर मोहर लगे। किसानों ने कहा कि विद्युत उत्पादन निगम हमारी शर्ते मानने को तैयार हैं तो समझौता लिखकर दें। तुरंत हाईकोर्ट से केस वापल ले लिया जाएगा।