हादसे में युवक की झांसी में मौत, गांव पहुंचा शव
रोजी-रोटी की तलाश में गुजरात जा रहा था करमहा का विशाल
संवाद न्यूज एजेंसी
गौरीबाजार। गुजरात के जामनगर जा रहे जिले के एक युवक की झांसी जिले में सड़क हादसे में मौत हो गई। बृहस्पतिवार की सुबह उसका शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूर्ण कर शव का पोस्टमार्टम कराया।
गौरीबाजार थानाक्षेत्र के करमहां गांव निवासी विशाल भारती (21) दो भाइयों में बड़ा था। परमेश्वर भारती छोटा है। पिता दूधनाथ प्रसाद विदेश में नौकरी करते हैं। मां का पहले ही निधन हो चुका है। इंटर पास होने के बाद वह रोजी-रोटी के चक्कर में था। परिवारवालों के अनुसार विशाल एक रिश्तेदार के बुलावे पर मंगलवार की सुबह गुजरात के जामनगर जाने के लिए बस से निकला। सरकारी बस से वह लखनऊ गया और वहां से निजी बस से जामनगर जा रहा था। बुधवार की सुबह पांच बजे झांसी के समीप मुख्य मार्ग पर विपरीत दिशा से तेज रफ्तार आ रहे एक ट्रक और बस में आमने-सामने की टक्कर हो गई। सड़क हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और तमाम लोग घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल विशाल भारती को वहां की पुलिस ने स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज झांसी के लिए भेज दिया। रास्ते में विशाल की मौत हो गई। वहां की पुलिस ने बुधवार को इसकी सूचना विशाल के परिवारवालों को दी। झांसी पहुंचे परिवार के लोग बृहस्पतिवार को भोर में शव को लेकर घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। विशाल के छोटे भाई परमेश्वर भारती, बहन नीलम और ममता कुमारी, बाबा मनोहर प्रसाद, चाचा अनुज प्रसाद, मिंटू प्रसाद सहित घर की महिलाओं तथा अन्य का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। थाना प्रभारी विजय सिंह गौर ने बताया कि विशाल के परिवारवालों की सूचना पर शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
नहर में मिला युवक शव, प्रधान ने कराई अंत्येष्टि
मिर्गी की बीमारी से पीड़ित था सुनील राजभर
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर कारखाना। एक चाय विक्रेता का शव हाटा की एक नहर में मिला। गांववालों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। बिना पोस्टमार्टम कराए गांववालों ने ग्राम प्रधान की मदद से शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
बरहज क्षेत्र के बिहारी राजभर लगभग 15 वर्ष पहले अपने बेटे सुनील राजभर को लेकर रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के हिरंदापुर चौराहे पर आए। पिता-पुत्र इधर-उधर काम कर अपना खर्च चलाते थे। गांववालों ने चंदा जुटाकर गांव के चौराहे पर ही एक छोटी सी चाय की दुकान करा दी। चार वर्ष पहले बिहारी राजभर की मौत हो गई। इसके बाद 19 वर्षीय सुनील राजभर चाय की दुकान चलाने लगा। गांववालों के मुताबिक सुनील मिर्गी की बीमारी से ग्रस्त था। उसे अक्सर मिर्गी का दौरा पड़ जाता था। दो दिन पहले शाम को वह अपनी झोपड़ी में सोया था। गांववालों का मानना है कि गर्मी से आजिज आकर वह नहर के किनारे चौकी पर आकर सो गया होगा। इसी दौरान मिर्गी का दौरा पड़ने से वह नहर मे गिर गया होगा। बृहस्पतिवार की सुबह राहगीरों ने नहर में एक शव पड़े होने की सूचना प्रभारी थानाध्यक्ष घनश्याम सिंह को दी। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने गांववालों की मदद से शव को बाहर निकलवाया। उसकी पहचान सुनील राजभर के रूप में ही हुई। गांववालों ने शव का दाह संस्कार करने से मना कर दिया। ग्राम प्रधान श्रीनिवास यादव और गांव के लोगों की मदद से दोपहर में पंचनामा भरवा कर पटनवापुल स्थित छोटी गंडक नदी किनारे उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रभारी थानाध्यक्ष घनश्याम सिंह ने बताया कि गांववालों ने सुनील को मिर्गी से ग्रस्त बताया। इसके चलते पंचनामा भरकर शव उन्हें सौंप दिया गया।