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बिना टेंडर कर दिया वर्क आर्डर, पोल खुली तो निरस्त

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बिना टेंडर कर दिया वर्क आर्डर, पोल खुली तो निरस्त
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देवरिया। स्वास्थ्य महकमे में भ्रष्टाचार की पोल परत-दर-परत खुलने लगी है। एक और नया मामला सामने आया है। जिले में बने 104 हेल्थ वेलनेस सेंटर्स की साज-सज्जा के लिए दो करोड़ आठ लाख रुपये मिले हैं। बिना टेंडर के, सीएमओ ने चहेते ठेकेदारों की फर्म्स को वर्क आर्डर दे दिया। डीएम की फटकार के बाद वर्क आर्डर निरस्त कर दिया।
जिले के 104 गांवों में हाल में हेल्थ वेलनेस सेंटर खोले गए हैं। साज-सज्जा के लिए प्रति सेंटर दो लाख रुपये खर्च होने हैं। आरोप है कि सीएमओ ने चुपके से चहेते ठेकेदारों की फर्म्स को टुकड़ों में वर्क आर्डर दे दिया। इसकी शिकायत अन्य ठेकेदारों ने डीएम एवं सीडीओ से की। डीएम ने पूछा तो सीएमओ ने अनभिज्ञता जताई। डीएम एवं सीडीओ ने एनआईसी से जांच कराई तो मामला पकड़ में आ गया। पोल खुलने के बाद डीएम ने सीएमओ को फटकार लगाई और विवरण तलब किया तो आर्डर निरस्त कर बताया गया कि जेम पोर्टल के माध्यम से 104 उपकेंद्रों पर साज-सज्जा का सामान खरीदने का आर्डर तीन फर्म्स को दिया गया था, जिसे निरस्त कर दिया गया है।
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टेंडर के बावजूद दूसरे को सौंप दिया वर्क आर्डर
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पैंफ्लेट के प्रकाशन में भी खेल हुआ है। 15 लाख 40 हजार पैंफ्लेट छापने का टेंडर हुआ। एक फर्म ने नब्बे पैसे की दर से टेंडर डाला। बावजूद इसके, टेंडर निरस्त कर सीएमओ ने एक रुपये पर चहेते ठेकेदार को वर्क आर्डर दे दिया। जो पैंफ्लेट छपकर आए, वह कार्यालय की शोभा बढ़ा रहे हैं। डीएम से इस मामले में टेंडर लेने वाले फर्म के प्रोपराइटर ने शिकायत की है।
स्वास्थ्य विभाग में सब कुछ नियमों के तहत होता है। शासन से आए धन को खर्च करने के लिए कमेटी बनी है। कमेटी में जो निर्णय होता है, उसी के अनुरूप कार्य होता है। टेंडर आमंत्रित करने से पहले कुछ फर्म्स से सैंपल मंगाए गए थे। टेंडर के लिए जेम पोर्टल पर सूचना दी गई थी, लेकिन सिर्फ दो-तीन फर्म्स ही आईं। इस कारण इसे निरस्त कर दिया गया है। जहां तक पैंफ्लेट का प्रश्न है, इसके लिए शासन से धन निर्धारित है, उसी दर पर छपाई कराई जाती है। -डॉ. आलोक पांडेय,
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सीएमओ
कोट:
बिना टेंडर के कुछ फर्मो को चोरी से वर्क आर्डर देने की शिकायत आई थी। एनआईसी से जांच के बाद पत्रावली सीएमओ से तलब की गई, जिसमें उन्होंने वर्क आर्डर निरस्त करने की जानकारी दी है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की कई अनियमितता सामने आई है जिसकी जांच अधिकारियों की टीम कर रही है।
रवींद्र कुमार
मुख्य विकास अधिकारी
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