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Deoria News: जहां से सभी को मदद की आस, वहीं से कर रहे थे जालसाजी

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एसपी कार्यालय के लिपिक और सिपाही पर है धोखाधड़ी का आरोप, दर्ज हुई है प्राथमिकी
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पिछले दिनों कोतवाली के एक दिवान को भी किया गया था निलंबित

इससे पहले सलेमपुर क्षेत्र में भी पुलिस कर्मियों पर धोखाधड़ी के लग चुके हैं आरोप
देवरिया। जिले में पुलिस कर्मियों पर पहले भी जालसाजी और छिनैती जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं। कुछ दिन पहले एक संदिग्ध आरोपी को भगाने के आरोप में भी एक पुलिस वाले पर कार्रवाई हुई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार एसपी कार्यालय में कार्यरत पुलिस कर्मियों ने ही सेना के जवान को जालसाजी का शिकार बना दिया। जबकि, लोगों को जब कहीं से राहत नहीं मिलती है, तब वे मदद की आस में एसपी कार्यालय पहुंचते हैं।
पीड़ित सेना के जवान का कहना है कि दोनों आरोपी उसे तीन साल से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। शिकायत करने पर उसे ही फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देने, जेल भेजवाने का धौंस दिखाते थे। पीड़ित का कहना है कि प्रकरण की गंभीरता से जांच हो तो इन पुलिस कर्मियों के और भी मामले सामने आ सकते हैं। पुलिस महकमे में भी इस बात की चर्चा है कि एसपी कार्यालय में रहते हुए भी इस तरह की हिमाकत करना आसान नहीं है। संभव है कि इनके कुछ और कारनामे भी जांच के बाद सामने आएं। कोतवाल राकेश राय का कहना है कि इस प्रकरण में वरिष्ठ अफसरों के निर्देश पर कार्रवाई हुई है। आगे जांच में और बातें सामने आएंगी।
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पहले भी आए थे ऐसे मामले
पुलिस महकमे में ऐसा मामले पहले भी आ चुके हैं। पिछले महीने ही देवरिया कोतवाली में तैनात एक पुलिस कर्मी ने एक जालसाज को भगाने में मदद की थी। जबकि जालसाज की घेराबंदी एसओजी टीम ने की थी और उसके खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा रहे थे। इससे पहले चार साल पहले गौरी बाजार थाने में तैनात एक सिपाही को फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के दम पर नौकरी हथियाने के आरोप में निलंबित किया गया था। उसके विरुद्ध धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
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उससे पहले वर्ष 2018 में लार थाने में तैनात पुलिस कर्मियों ने लूट के मामले में आरोपियों को बचाने के लिए रुपये लिए थे। जांच में मामला सामने आने के बाद तीन पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की गई थी। उन पुलिस कर्मियों पर अन्य मामलों में भी लापरवाही के आरोप लगे थे। वर्ष 2016 में भी एक पुलिसकर्मी 65 लाख रुपये एक बैंक से लेकर भाग गया था। उस पर भी कार्रवाई हुई थी।
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