तटवर्ती इलाके में बसे लोगों को सताने लगी बाढ़ की चिंता, सलेमपुर क्षेत्र में देवसिया के पास नदी कर रही कटान
मूसलाधार बारिश से सरयू और राप्ती के जलस्तर में बढ़त, तीन पाट में बहने लगी नदी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। मानसून के दस्तक देने और तीन दिनों से नगर-क्षेत्र में बारिश हो रही है। इससे सरयू और राप्ती नदी के जलस्तर में बढ़त दर्ज किया गया है। थाना घाट से एक किलोमीटर दक्षिण होकर प्रवाहित होने वाली सरयू तीन पाट में बह रही है। बृहस्पतिवार की देर रात क्षेत्र में बारिश शुरु हो गई है। जो थमने का नाम नहीं ले रही है। तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। वहीं नदी भी करवट लेने लगी है। कपरवार, मोहरा, महेन से होकर बह रही राप्ती के जलस्तर में व़ृद्धि हुई है। जबकि सरयू मुख्य धारा के अलावा दो अन्य जगहों से प्रवाहित होने लगी है। जो थाना घाट के करीब भी पहुंच गई है। जलस्तर बढ़ने से नदी कुछ जगहों पर कटान भी कर रही है।
कोट-
सरयू और राप्ती के जलस्तर में तेजी आई है, लेकिन नदी का पानी अभी बंधों से दूर है। खतरे की कोई बात नहीं है।
अशोक द्विवेदी सहायक अभियंता, बाढ़ खंड विभाग
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गोर्रा और राप्ती नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू
24 घंटे में 500 सेमी बढ़ा गोर्रा का जलस्तर
कटान स्थलों पर गोर्रा का दबाव, नदी में झुका बोल्डर पिचिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर/एकौना। दो दिन की बारिश का असर अब गोर्रा और राप्ती नदी के जलस्तर पर पड़ने लगा है। रविवार को क्षेत्र के गोर्रा और राप्ती नदी के जलस्तर में करीब पांच सौ सेमी बढ़ोतरी दर्ज की गई। गोर्रा नदी पचलड़ी- बेलवा और पलिया छपरा बांध के कटान स्थलों पर असर दिखा रही है। रतनपुर गांव के पास कटान रोधी बोल्डर पिचिंग नदी की तरफ झुक गया है। जिसे देख लोग कार्य के मानक पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
गोर्रा का जलस्तर रविवार की शाम 66 मीटर और राप्ती नदी 65.60 मीटर पर बह रही थी, हालांकि दोनों नदियां डेंजर लेवर 70.50 मीटर से नीचे हैं। पचलड़ी बेलवा बांध के रतनपुर गांव के पास एक साल से करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से बोल्डर पिचिंग का कार्य कराया जा रहा है। कार्य पूर्ण करने की तिथि 30 जून थी, बावजूद इसके अभी करीब 30 प्रतिशत कार्य अधूरा है। यहां शनिवार से ही बोल्डर पिचिंग की सीढि़यां नदी की तरफ झुक रही हैं। बोल्डर पिचिंग नदी में गिरा तो बंधा नदी के वेग को रोकने में अक्षम साबित होंगे। पलिया छपरा बांध पर कीचड़ से आवागमन प्रभावित हो गया है। बहोरा दलपतपुर गांव के निकट राहगीरों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। कटारी नाला पर निर्माणाधीन पुल से रास्ता बंद होने के कारण लोगों को वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था, रास्ते पर जलभराव से चार पहिया वाहनों को करीब तीस किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही। बरसात का मौसम शुरु होते ही आवागमन को लेकर दोआबा के लोगों की बढ़ी दुर्दशा पर लोगों ने नाराजगी जताई। पचरुखा के विजय प्रताप सिंह, संतोष सिंह, अजीत दूबे, ब्रम्हानंद दूबे, ब्रजेश राव, नरेंद्र यादव, रामेश्वर पाल आदि ने कहा कि हर साल बरसात में 52 गांव के लोगों को आवाजाही के लिए परेशानी झेलनी पड़ती है। शासन और प्रशासन के लोग राहगीरों की समस्या को लेकर लापरवाह बने है। इस बाबत एसडीएम अरुण कुमार वर्मा ने कहा कि सिंचाई विभाग को बंधों की निगरानी करते रहने का निर्देश दिया गया है। लोक निर्माण विभाग को निर्माणाधीन पुल के करीब रास्ता ठीक करने को कहा गया है।
सरयू का जलस्तर बढ़ते ही देवसिया गांव के सामने कटान शुरू
तटवर्ती गांववालों की बढ़ी चिंता, करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं रुक रही कटान
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। कटान से बचाव के लिए बाढ़ खंड विभाग की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है। सरयू नदी में पानी बढ़ने से कटान शुरू हो गई है।इसको लेकर तटवर्ती गांव वालों की अभी से चिंता बढ़ने लगी है। नदी जिस स्थान पर कटान कर रही है वहां बाढ़ विभाग की ओर से करीब छह साल पहले बोल्डर से लांचिंग, पीचिंग का कार्य हो चुका है। स्थान का चयन गलत होने से कटान रोकने में मददगार नहीं हो रहा है।
भागलपुर ब्लाॅक के देवसिया गांव के सामने कटान रोकने के लिए बाढ़ विभाग की ओर से करोड़ों रुपये बहाए गए हैं, लेकिन बाढ़ विभाग के ठोस कदम नहीं उठाने के चलते कटान बढ़ गया है। तटवर्ती गांववालों को नदी में पानी बढ़ने से बाढ़ और कटान की चिंता सताने लगती है। इधर करीब पांच दिनों से सरयू नदी का पानी बढ़ रहा है। इससे देवसिया गांव के सामने नदी कटान कर रही है। इसकी शिकायत गांव वालों ने बाढ़ विभाग के अधिकारियों से की थी, लेकिन कटान रोकने के लिए ठोस पहल विभाग की ओर से नहीं किया जा रहा है।
छह साल पहले लखनऊ से आई टीम ने गांव के कटान स्थल का निरीक्षण कर गांव को कटान के मुहाने पर होने की बात कही थी, उसके बाद पांच करोड़ खर्च कर गांव के सामने बोल्डरनुमा लांचिंग और बोल्डर से पिचिंग का कार्य बाढ़ विभाग ने कराया, जो कटान रोकने में असफल साबित हो रहा है। नदी का दबाव बढ़ने पर ही बाढ़ विभाग की नींद खुलती है, अगर समय रहते विभाग नहीं चेता तो बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ सकती है। बाढ़ विभाग के अभियंता अशोक कुमार द्विवेदी ने बताया कि कटान की जानकारी नहीं है, अगर कटान हो रही है तो रोकने का उपाय कराया जाएगा।