विनोद जायसवाल देवरिया लोकसभा बीएसपी।
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देवरिया। बसपा की चौथी सूची में जिले की तीनों सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित होने के बाद चुनावी घमासान ने तेजी पकड़ ली है। हालांकि, इन सीटों पर उन नामों का ही एलान हुआ है, जो पहले से ही बतौर प्रभारी क्षेत्र में सक्रिय होकर प्रचार में लगे थे। अब उनके अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने से टिकट में बदलाव की अफवाहों पर विराम लगा है। लिहाजा, उनका चुनावी अभियान भी गति पकड़ने लगा है।
देवरिया सदर सीट से पार्टी ने विनोद जायसवाल को प्रत्याशी घोषित किया है। करीब दो माह पहले ही पार्टी ने उन्हें प्रभारी बनाकर लोकसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी थी। तभी से उनका चुनाव लड़ना तय हो गया था। बावजूद विरोधी खेमे में यह हवा थी कि ऐन वक्त पर पार्टी प्रत्याशी में बदलाव भी कर सकती है। उनका इशारा भाजपा उम्मीदवार की ओर था। राजनीतिक सूत्रों का दावा था कि ब्राह्मण बहुल सीट पर भाजपा अगर किसी गैर ब्राह्मण को टिकट देती है तो बसपा भी अपने टिकट पर पुनर्विचार कर सकती थी। बहरहाल, भाजपा ने तो पत्ते नहीं खोले, लेकिन रविवार को बसपा ने साफ कर दिया कि वह विनोद जायसवाल के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेगी। इस सीट पर वैश्य मतदाता भी बड़ी तादाद में है। इन्हीं वोटों की बदौलत 2009 में विनोद के ससुर गोरख जायसवाल सांसद निर्वाचित हुए थे। यह बात दीगर है कि तब तत्कालीन बसपा सरकार के प्रभावशाली विधायक और गोरख जायसवाल के पुत्र रामप्रसाद जायसवाल जीवित थे। विनोद उन्हीं की विरासत को आगे बढ़ाने की कवायद में हैं।
सलेमपुर के गढ़ में जूझेंगे प्रदेश अध्यक्ष
सलेमपुर सीट पर निवर्तमान सांसद और भाजपा प्रत्याशी रवींद्र कुशवाहा को टक्कर देने के लिए पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को मैदान में उतारा है। स्वजातीय मतों की बहुलता वाली इस सीट को सुरक्षित मानते हुए वह काफी पहले से ही प्रचार में जुटे हुए हैं। अब अधिकृत घोषणा के बाद उनका चुनावी संपर्क भी तेज हुआ है। दोनों प्रमुख दलों से कुशवाहा प्रत्याशी होने और कांग्रेस से ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे जाने के बाद इस सीट पर मामला रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषक अब दलित, राजभर व अन्य जाति के वोटों के झुकाव को निर्णायक बता रहे हैं।