लाभार्थी मुन्ना भगत के घर बना शौचालय
देवरिया। सरकार ने 2014 में गांवों को गंदगी मुक्त करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया था। इसके तहत घर-घर शौचालय बनवाए गए।
लोग खुले में शौच न करें, प्रचार प्रसार से लोगों को इसके लिए प्रेरित किया गया। यही नहीं निगरानी के लिए टीमें लगाई गईं। मान लिया गया के अब गांवों में लोग खुले में शौच नहीं करते लिहाजा अधिकांश गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया।
अब पूरा मामला ठंडे बस्ते में है। कुछ ही वर्षों में शौचालय बेकार हो गए। ये शौचालय जलावन के गोदाम बन गए हैं। कहीं उनमें लकड़ी रखी है तो उपले शोभा बढ़ा रहे हैं। कहीं कहीं शौचालय बिना इस्तेमाल हुए ही ध्वस्त हो गए हैं। जिले अलग-अलग क्षेत्रों में, नजारा एक जैसा ही दिखा।
करमुआ में अधिकांश शौचालय बंद : लार संवाद के अनुसार करमुआ गांव की आबादी 1700 से अधिक है। करीब 200 परिवार रहता है। सात वर्ष पूर्व सभी घरों के लिए मानक के अनुरूप ग्राम पंचायत की तरफ से व्यक्तिगत शौचालय बनवाया गया था। कुछ दिनों तक लोगो ने इसका प्रयोग किया। जिसके बाद गांव को कागजो में ओडीएफ (ओपन डिफिशिएंसी फ्री या खुले में शौच मुक्त) घोषित कर दिया गया।
अब स्थिति यह है कि कई लोगों ने बनवाए गए शौचालय को तोड़ दिया है। जो बचे हैं उसमे कहीं उपला, लकड़ी तो कहीं पशुओं के लिए चारा रखा जा रहा है। महिला पुरुष इज्जत घर की बजाय फिर खेत में जाने लगे हैं।
ग्राम प्रधान तपनारायन यादव ने बताया कि सात साल पहले गांव ओडीएफ घोषित हुआ था। सभी घरों में शौचालय बना था। लोगों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है।