लार/देवरिया। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में छात्रों के चयन को लेकर लापरवाही सामने आई है। बिना जांच किए ही आवेदन फाॅर्म को सत्यापित कर दिया गया है। जिससे पात्र छात्रों को स्कूल आवंटित नहीं हो सका है। जबकि अपात्र छात्रों को नियम ताक पर रख विद्यालय आवंटित कर दिया गया है। शुक्रवार को इसकी जानकारी अभिभावकों को हुई तो जिम्मेदारों पर लापरवाही का आरोप लगा कार्रवाई की मांग की है।
नए शैक्षिक सत्र 2026-27 में निशुल्क एवं बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत प्रथम चरण में जिले के निजी विद्यालयों में नर्सरी से कक्षा एक तक प्रवेश के लिए दो फरवरी से 16 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। नियम यह है कि जो भी आवेदन पोर्टल पर आए उसे गहनता से जांच की जाए, ताकि एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले छात्र को ही विद्यालय आवंटित किया जा सके। आरोप है कि बिना जांच के ही आए हुए सभी आवेदनों को मनमाने तरीके से सत्यापित कर दिया गया है। ऐसे में जारी की गई लाटरी में दो से तीन किलोमीटर दूर ग्रामीणांचल के छात्रों को विद्यालय आवंटित कर दिया गया है। वहीं शहरीय क्षेत्र के पात्र छात्रों का नाम गायब है, जबकी उनके घर से विद्यालय की दूरी महज पांच सौ से आठ सौ मीटर दूर है। साथ ही उन्होंने पहले दिन आवेदन भी किया था। इसके बावजूद सूची में नाम नहीं है।
लार नगर के गयागिर वार्ड निवासी अधिवक्ता प्रियेशनाथ त्रिपाठी ने कहा कि जिस विद्यालय में दाखिला के लिए हमने आवेदन किया था उसकी दूरी घर से महज सात सौ मीटर है। लेकिन बिटिया का चयन नहीं हुआ है। वहीं तीन किलोमीटर दूर के छात्रों का चयन किया गया है। जो आरटीई नियम के विरुद्ध है। कोईरी टोला वार्ड के साहू विशाल गुप्ता ने बताया कि अगर जिम्मेदारों ने आवेदनों की जांच की होती तो पात्र छात्रों को ही सीट आवंटित होती। दोबारा जांच कर पात्र छात्रों को सीट आवंटित की जाए, वरना धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
वर्जन:
सब कुछ ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से हुआ है। मेरे पास अभी शिकायत नहीं आई है। अगर इस तरह की शिकायत मिलती है तो जांच करा कार्रवाई की जाएगी।
- शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए देवरिया
एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले छात्रों का करना है चयन
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए एक किलोमीटर की दूरी निर्धारित है। इससे अधिक दूरी के छात्रों का चयन नियम विरुद्ध है। वहीं ग्रामीण अंचलों में भी छात्रों को एक किलोमीटर के दायरे में नामांकन मिलना है।
विद्यालयों में कम संख्या दिखा किया गया है मैपिंग
आरटीई नियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को निजी विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा हासिल करने का अधिकार है। इसको लेकर मैपिंग कर कक्षा में नामांकन के सापेक्ष सीट तय की जाती है। ताकि उसका 25 प्रतिशत सीट आरटीई के छात्रों के लिए आरक्षित किया जा सके। इस सीट को कम करने के लिए विद्यालय के प्रबंधकों ने शिक्षा विभाग की मिली भगत से मैपिंग के दौरान कम संख्या दिखाया है। जिसका लाभ आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को नही मिल पा रहा है।