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सेल्हरापुर सैयद यासीन शाह की दरगाह पर चल रहे 43वें सालाना उर्स का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। क्षेत्र के सेल्हरापुर में सैयद यासीन शाह की दरगाह पर चल रहे 43वें सालाना उर्स का बुधवार को समापन हो गया। इस दौरान दरगाह प्रमुख ने दूरदराज से पहुंचे जायरीन की सलामती के लिए बाबा से दुआएं मांगीं। मंगलवार की पूरी रात बाबा की शान में कव्वालों ने कव्वाली प्रस्तुत कर समा बांध दिया। उर्स समापन के बाद दूसरे प्रांतों से आए जायरीन अपने गन्तव्य को निकल गए।
सेल्हरापुर में प्रसिद्ध सूफी संत सैय्यद यासीन शाह की दरगाह पर चल रहे दो दिवसीय सालाना उर्स के समापन अवसर पर सरकारी चादर गागर के दौरान दरगाह के आस-पास जायरीन के जत्थे हाथ में प्रसाद लिए इकट्ठा होकर मन्नतें पूरी होने पर बाबा का जयकारे लगाए। दरगाह प्रमुख सैयद शकील अहमद शाह, सैयद मेहंदी हसन शाह और सैयद नूर हसन शाह ने बाहर से पहुंचे जायरीन को पुनः उनके गंतव्य तक सही सलामत पहुंचने के लिए बाबा से दरखास्त की।
उधर, सूफी महफिल में जौनपुर निवासी एवं अजमेर शरीफ में सूफी कौव्वाली के बादशाह कहे जाने वाले सुल्तान सादरी ने सैयद यासीन शाह से मांग लो सदका हुसैन का..।। अली मौला..मनकुंतों मौला प्रस्तुत कर महफिल में समा बांध दिया। इसके बाद गाजीपुर से आए गुड्डू ने आज रंग है हरी.. सैयद पिया के आगन में प्रस्तुत कर महफिल को खुशगवार बना दिया। वाराणसी के सहाबुद्दीन, दुल्लापुर से निजाम वारसी और गोरखपुर से पहुंचे शौकत अली ने बाबा की शान में एक से बढ़कर एक कव्वाली प्रस्तुत की।
इस दौरान ग्राम प्रधान पति उमेश यादव, सेना के जवान डीके यादव, धुपलाल, उदयभान और मुखलाल ने उर्स में विशेष सहयोग किया।
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कुल दुआ की रस्म के साथ उर्स का हुआ समापन
उर्स के आखिरी पड़ाव को कुल दुआ कहते हैं। इसी रस्म के बाद दरगाह प्रमुख समेत सभी जायरीन ने इकट्ठा होकर बाबा से सलामती की दुआएं की। इसके साथ ही बाबा से अर्जी लगाई गई कि जिस तरह से हाजिरी लगी है, हमारी अर्जी कबूल करिए और फिर से हमें बुलाइए। हम हंसते हुए यहां आएं। इस दौरान देशी घी से बने लड्डू प्रसाद के रूप में वितरित किए गए। यही प्रसाद जायरीन अपने घरों को लेकर जाते हैं।