पशु तस्करों की जमानत में जमानतदारों के अलावा पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। कसया थाने में पशु तस्करों की जमानत लेने वाले 12 जमानतदारों पर प्राथमिकी दर्ज है। जमानत में अभिलेखों का फर्जीवाड़ा कर कोर्ट को गुमराह करने का मामला भी जांच में सामने आया है।
जमानतदारों के सत्यापन में लापरवाही पर कसया थाने में तैनात कोर्ट मुहर्रिर दिलीप कुमार और मोनू यादव को एसपी ने निलंबित कर दिया है। कुशीनगर के रास्ते पशु तस्करी के खेल में जिले के कई ऐसे चेहरे शामिल रहे हैं जो पशु तस्करों की जमानत लेते रहे, एक-एक ने 25 से 30 पशु तस्करों की जमानत ली है।
पुलिस की जांच में ऐसे 12 जमानतदार मिले हैं। जांच में पता चला कि जमानत देने से पहले कोर्ट जमानतदारों का सत्यापन कराता है, इसकी रिपोर्ट स्थानीय थाने और राजस्वकर्मियों से मंगाई जाती है। कई जमानतदारों के सत्यापन में गलत रिपोर्ट कोर्ट को दी गई।
एसपी केशव कुमार ने बताया कि कसया थाने के कोर्ट मुहर्रिर दिलीप कुमार और मोनू यादव की भूमिका संदिग्ध मिलने पर दोनों को निलंबित कर दिया गया है और उनकी भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।