बरहज के अनंत आश्रम स्थित पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की स्थापित की गई मूर्ति संवाद
बरहज। बलिदान दिवस के अवसर पर शुक्रवार को अनंत आश्रम स्थित पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की समाधिस्थल पर पहुंचकर लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया।
बताया जाता है कि पंडित बिस्मिल ने फांसी से पूर्व अपना पार्थिव शरीर बाबा राघवदास को सौंपने की इच्छा जताई थी। 1980 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह ने उनके मूर्ति का अनावरण किया था लेकिन पर्यटन स्थल घोषित होने के बावजूद समाधिस्थल आज भी उपेक्षित है। पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की समाधिस्थल और आश्रम को तोरण-पताकाओं से सजाया गया था। बलिदान दिवस के अवसर पर नगर सहित दूर-दराज से आये लोगों ने बिस्मिल की समाधिस्थली पर पुष्प अर्पित किया। इस अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। अनंत पीठ के पीठाधीश्वर आंजनेय दास ने कहा कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल केवल क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि भारतीय चेतना के प्रतीक थे।
गोष्ठी को पालिकाध्यक्ष श्वेता जायसवाल, डॉ. ओपी शुक्ल आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर अनिरूद्ध मिश्र, डॉ. अरविंद पांडेय, अभय पांडेय माैजूद रहे।