संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया/तरकुलवा। ग्रामीण इलाकों में आर्थिक स्वालंबन और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर माइक्रो फाइनेंस कंपनियां थाना क्षेत्र के गांवों में तेजी से जड़ें जमा रही हैं।
इन कंपनियों की ऊंची ब्याज दरें और कर्ज वसूली के कठोर तरीके कमजोर तबके की महिलाओं के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। कंपनियों की सख्त वसूली नीति और एजेंट की धमकियों से परेशान कई महिलाएं घर-बार छोड़ चुकी हैं। खेत भी बंधक है। घर-गृहस्थी चौपट हो गई है। सिधावे धर्मागतपट्टी, पकड़ी छापर पटखौली, हरैया, कनकपुरा, सोंहुला रामनगर, सोहनारिया, चिउटहा, परासखाड़, महुआपाटन, सिसवा आदि गांवों की महिलाएं माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की मकड़जाल में उलझ चुकी हैं। सिधावे धर्मागतपट्टी गांव की रूबी देवी, अंजनी देवी, कमलावती देवी, गुड्डी देवी, ललिता देवी, रेहाना खातून,आशा देवी सहित दर्जनों महिलाएं कर्ज के दलदल में उलझ कर तबाह हो रही हैं।
उनका कहना है कि कंपनियां सस्ते ब्याज दर पर लोन देने का झांसा देकर जाल में फंसाती हैं। बाद में 28-30 प्रतिशत ब्याज दर वसूलने लगती हैं। इससे बाद में कई गुना ज्यादा रकम वसूलने का दबाव बनाने लगती हैं।