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Deoria News: बेटी को पहलवान बनाने के लिए पिता ने दरवाजे पर बना दिया अखाड़ा

Sat, 28 Feb 2026 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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नेहा - फोटो : क्षेत्र पंचायत की बैठक में हंगामा करते लोगों और पुलिस के बीच नोकझोक।
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तरकुलवा। जिले के बंजरिया गांव की नेहा अपने पिता के सपनों को साकार करने के लिए अखाड़े में दिन-रात खूब पसीना बहा रही है। 10 साल की उम्र में पहली बार अखाड़े में कदम रखने वाली नेहा अब प्रदेश स्तर पर जिले का नाम रोशन कर रही है। बड़ी बहन रुपाली को दांवपेंच आजमाता देख छोटी बहन भी अखाड़े में उतरी तो गांव वालों ने ताना मारना शुरू कर दिया। इस पर पिता ने बेटियों के प्रैक्टिस के लिए दरवाजे पर मिट्टी भरकर अखाड़ा बना दिया था। पिछले सप्ताह नेहा ने वाराणसी में हुए राज्य स्तरीय अंडर-17 कुश्ती प्रतियोगिता में पिता के सपनों को साकार करते हुए गोल्ड जीता था। अब वह राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबले की तैयारी में जुटी है।
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पथरदेवा विकास खंड के ग्राम पंचायत बंजरिया निवासी अनिरुद्ध गुप्ता छोटी सी जमीन में खेती करके किसी तरह से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। रोजमर्रा के खर्च के लिए पटना शहर में फल की दुकान लगाते हैं। परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटियां रूपाली, शिखा और नेहा और एक बेटा विराट है। शुरू से ही तीनों बेटियां खेल में दिलचस्पी रखती हैं। बड़ी बेटी रूपाली कुश्ती में यूनिवर्सिटी स्तर पर दो बार गोल्ड मेडल जीत चुकी है। दूसरे नंबर की शिखा एथलीट है, जो 150 मीटर और 800 मीटर दौड़ में चार बार यूपी व दो बार बिहार से नेशनल खेल चुकी हैं। छोटी बेटी नेहा भी शुरू में एथलेटिक्स में प्रतिभाग करती थीं, लेकिन बड़ी बहन रूपाली को कुश्ती लड़ते देख उसने भी कुश्ती में दांव आजमाना शुरू कर दिया।
पिता अनिरुद्ध जब बेटियों को कुश्ती प्रतियोगिता में शामिल कराने ले जाते थे तो लोग उन पर हंसते थे, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। रूपाली को कुश्ती में पहचान दिलाने की खातिर समाज के ताने झेले। 10 साल की उम्र में नेहा ने कनकपुरा में आयोजित दंगल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उसका मुकाबला भरौटा गांव की पहलवान बबीता से हुआ। मुकाबला बराबरी पर छूटा।
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बड़ी बहन बनीं गुरु

पिता अनिरुद्ध ने बेटी के सपने को हकीकत में बदलने के लिए दरवाजे पर मिट्टी भर कर अखाड़ा बनवाया। इसी अखाड़े में नेहा ने अपनी बड़ी बहन रूपाली से दांवपेंच सीखना शुरू किया। वर्ष 2024 में नेहा ने कुश्ती की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में पहला कांस्य पदक जीता। इस बीच रूपाली का चयन 2025 में स्पोर्ट्स हॉस्टल के लिए हो गया। वर्ष 2025 में गोरखपुर के रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित 69वीं प्रदेश स्तरीय स्कूली कुश्ती प्रतियोगिता के 65 किलो भार वर्ग में नेहा ने मेरठ की पहलवान को चित कर गोल्ड मेडल हासिल किया।

आर्थिक तंगी को हराकर नेहा ने वाराणसी में जीता गोल्ड

आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद नेहा ने कुश्ती का अभ्यास जारी रखा। पिता अनिरुद्ध गुप्ता का भी उन्हें भरपूर साथ मिला। कुश्ती संगठन द्वारा वाराणसी में आयोजित अंडर-17 महिला कुश्ती प्रतियोगिता के 65 किलो भार वर्ग में नेहा ने अपने प्रतिद्वंदी बागपत की पहलवान अंशिका को चित कर इतिहास रच दिया। इस प्रतियोगिता में उसने गोल्ड मेडल जीतकर नेशनल लेवल पर आयोजित होने वाली कुश्ती प्रतियोगिता के लिए एंट्री कर ली। नेहा का सपना है कि वह अपने देश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीते। पिता अनिरुद्ध कहते हैं कि उनकी बेटी जिस दिन देश के लिए गोल्ड जीतेगी वह क्षण उनके जीवन का सबसे बड़ा क्षण होगा। उन्होंने शासन-प्रशासन स्तर से खिलाड़ियों के लिए आर्थिक मदद की भी गुहार लगाई है।
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