रुद्रपुर। डेंगू की बीमारी रुद्रपुर में महामारी का रुप ले चुकी है। यहां पैथोलॉजी से मिलने वाले आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जबकि सरकारी अस्पताल में डेंगू की मरीजों की संख्या नगण्य बताई जा रही है। दरअसल डेंगू को लेकर स्वास्थ्य महकमा तथ्य छुपाने में लगा है। रुद्रपुर के खजुहा चौराहे पर डेंगू की चपेट में तीन लोग आ चुके है। इनमें से एक चिकित्सक भी हैं।
क्षेत्र में भी डेंगू के मरीजों की तादात बढ़ती जा रही है। डेंगू से ग्रसित अधिकतर लोग अपना इलाज देवरिया या गोरखपुर में निजी चिकित्सालयों में करा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में इलाज के अभाव में लोग जान बचाने को महंगे निजी अस्पताल का सहारा ले रहे हैं। रुद्रपुर नगर के तीन पैथालॉजी सेंटरों से मिली रिपोर्ट के अनुसार बुखार से पीड़ित पांच मरीजों में से एक मरीज के खून के नमूने में डेंगू के लक्षण मिले हैं। डेंगू के मरीज को सरकारी डॉक्टर डेंगू घोषित करने से कतरा रहे हैं। खजुआ चौराहे के रहने वाले चिकित्सक डॉ ओमप्रकाश गुप्ता डेंगू की चपेट में आ गए।
उनका प्लेटलेट्स तीस हजार से नीचे आ गया। चिकित्सक को गोरखपुर के निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। मलहटोली वार्ड के व्यवसायी नगेंद्र पटेल को डेंगू हो गया है। उनका इलाज भी गोरखपुर में चल रहा है। रतनपुर गांव के रहने वाले सोनू गोड़ भी डेंगू की चपेट में हैं। इसके अलावा कस्बे और देहात के डेंगू से ग्रसित कई रोगियों का इलाज गोरखपुर के निजी अस्पतालों में चल रहा है।
रुद्रपुुर के एक पैथोलॉजी सेंटर के संचालक ने बताया कि यहां डेंगू महामारी का रुप लेकर चुका है। सरकारी अस्पताल इलाज के बजाय बीमारी को छुपा रहे हैं। इस बाबत सीएचसी के अधीक्षक डॉ आरपी यादव ने कहा कि अस्पताल में डेंगू का अब तक कोई मरीज नहीं आया है। बुखार के कई मरीज मिले हैं उनका इलाज चल रहा है। डेंगू के इलाज की जिला अस्पताल में व्यवस्था की गई है। डेंगू का मरीज मिलने पर उसे तत्काल जिला अस्पताल भेज कर इलाज शुरू कराया जाएगा।