मानदेय भुगतान के लिए आमरण अनशन पर बैठे मजदूर दोपहर में बेहोश हो गए। इससे अनशनस्थल पर अफरा तफरी मच गई। किसी तरह मजदूर साथियों ने बेहोश लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
बिजली संविदा मजदूर संगठन के कसया और पडरौना के संविदा मजदूर बकाया मानदेय के लिए पिछले एक महीने से अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में आंदोलन चला रहे हैं। इस दिशा में कोई आस नहीं मिलने पर 21 जून से पांच मजदूरों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। पिछले दो दिनों से अनशनकारियों की हालत बिगड़ने लगी। हालांकि कोई अधिकारी सुधि लेने तक नहीं पहुंचा। शनिवार को दोपहर दो बजे राजेश तिवारी, राजकिशोर दुबे और उमेश गौड की हालत नाजुक हो गई। कुछ देर बाद मजदूर बेहोश हो गए। इससे अनशन स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
कुछ लोगों ने एम्बुलेंस को कॉल किया हालांकि काफी समय तक एम्बुलेंस नहीं पहुंची। किसी तरह बेहोश अनशनकारियों को अस्पताल में पहुंचाया गया। उधर, मजदूर नेताओं ने अधीक्षण अभियंता की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा किया। उनका कहना था कि विभागीय अधिकारियों को मजदूरों की एकता के आगे झुकना होगा। फूट डालने की कोशिश सफल नहीं होगी। धरनास्थल पर मुकेश सिंह, अशोक, राजेश मिश्र, नेऊर शर्मा, सत्येंद्र, सुरेंद्र, अनिल पाल समेत कई अन्य विद्युत संविदा मजदूर मौजूद रहे।