जुलाई माह से छात्रावास खोलने की तैयारी, प्रशिक्षणार्थी को खलेगी बेहतर प्रशिक्षण की कमी
दस साल में देवरिया के क्रिकेट छात्रावास का प्रदर्शन रहा दयनीय, उठते रहे हैं सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में संचालित प्रदेश स्तरीय क्रिकेट छात्रावास जुलाई के प्रथम सप्ताह से संबंधित खिलाड़ियों के लिए खोल दिया जाएगा। बाहर से आए खिलाड़ी यहां आएंगे, रहेगे, खाएंगे, पढ़ेंगे लेकिन सबसे जरूरी जिस खेल में उनका चयन हुआ है, उसका अभ्यास कैसे करेंगे, यह सवाल खड़ा हो रहे है। जिम्मेदार खेल निदेशालय के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं
स्पोर्ट्स स्टेडियम में पिछले छह माह में क्रिकेट के लिए अच्छे नहीं गुजरे हैं। फरवरी माह के दूसरे सप्ताह के बाद से ही छात्रावास का प्रशिक्षण सत्र पूरी तरह बेपटरी पर है। यहां आवासीय सुविधा में रहने वाले प्रत्येक खिलाड़ी पर हर दिन 375 रुपये का खर्च शासन की ओर से किया जाता है। जिला, मंडल, स्टेट ट्रायल के बाद चयनित खिलाड़ी केंद्रीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल होकर इसमें भी बेहतर हुए तो उनका नामांकन छात्रावास के लिए किया जाता है। प्रदेश में अभी मेरठ, ग्रीन पार्क स्टेडियम कानपुर, फतेहपुर और देवरिया में क्रिकेट छात्रावास खेल निदेशालय की ओर से संचालित हैं। लेकिन ऊपर के अधिकारी फरवरी माह के बाद एक प्रशिक्षक तक यहां नहीं दे पाए हैं। एक तरफ जहां खेल व खिलाड़ियों के विकास को लेकर केंद्र सरकार बेहद गंभीर है, व्यवस्था को सुधारने के लिए अवस्थापना सुविधाओं पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन खेल निदेशालय से जुड़े उच्चाधिकारी क्रिकेट छात्रावास के प्रदर्शन एवं अव्यवस्था को सुधारने के प्रति जरा भी गंभीर नहीं दिखते। इसका प्रमाण ऐसे मिलता है कि प्रदेश स्तरीय चार क्रिकेट छात्रावासों में शामिल देवरिया छात्रावास में छह माह से एक प्रशिक्षक की तलाश नहीं की जा सकी है।
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तीन साल में प्रदर्शन बेहतर नहीं तो निष्कासन का डर
मेरठ व कानपुर छात्रावास के प्रशिक्षणार्थी रह चुके अबूबकरनगर निवासी सीनियर खिलाड़ी शाने हबीब जो अब रजला रोड पर देवरिया क्रिकेट एकेडमी चलाते हैं, ने मंगलवार को बताया कि छात्रावास में जब कोई सिखाने वाला नहीं होगा तो खिलाड़ी का भविष्य अंधकारमय ही होगा। छात्रावास में तीन साल का ही मौका अपने को सिद्घ करने को मिलता है। स्टेट व नेशनल खेलने के बाद ही रहने ही अवधि पांच साल हो जाती है। बेहतर प्रशिक्षण नहीं मिला तो यह तय है कि खिलाड़ी तीन साल में ही बाहर हो जाएगा।
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वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के 90 से अधिक खिलाड़ी भी हैं परेशान
स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट के खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर आ गया है। मई माह में गाजीपुर निवासी सौरभ राय को खेल निदेशालय ने प्रशिक्षक तैनात किया, हालांकि उनके ज्वाइन नहीं करने से खिलाड़ी मायूस हो चले हैं। इससे उनका प्रतिदिन का अभ्यास प्रभावित हो रहा है। इधर खेल कार्यालय में हर आने वाला क्रिकेट शिविर कब शुरू होगा, इसके बारे में पूछताछ कर रहा है। जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि नए सत्र में पंजीकरण करा चुके 90 से अधिक खिलाड़ी नए प्रशिक्षक के आने का इंतजार कर रहे हैं, हालांकि उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। जबकि क्रिकेट का क्रेज होने के चलते सबसे ज्यादा खिलाड़ी इसी में पंजीकरण कराना चाह रहे हैं।
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जुलाई पहले सप्ताह से यहां के क्रिकेट व वालीबाल छात्रावास पुराने व नए चयनित खिलाडियों के लिए पुन: खोल दिया जाएगा। खेल निदेशालय से एवं अभी कुछ दिन पहले एक निजी कार्यक्रम में जनपद में आए खेल मंत्री से भी यहां प्रशिक्षक के तैनाती की मांग की गई है।
... राज नारायण प्रसाद, क्रीड़ाधिकारी