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नदी और बांध के बीच खनन से बढ़ा खतरा

Wed, 08 Jun 2016 12:35 AM IST
deoria
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अपराध् - फोटो : vishwvijay tiwari
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रुद्रपुर/एकौना। दोआबा के डेंजर जोन में सुबह और शाम बदस्तूर मिट्टी का खनन जारी है। जेसीबी लगाकर बांध और नदी के बीच की मिट्टी कारोबारी उठवा ले जाते हैं। सड़कों पर पूरे दिन ट्राली से मिट्टी ढोई जाती रहती है। खनन से नदियों का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति भयावह होने की आशंका बनी है। वहीं, जिम्मेदार इन पर शिकंजा कसने से कतराते रहते हैं। नदी और बांध के बीच के अलावा क्षेत्र में दर्जन भर जगहों पर अवैध खनन का कार्य जारी है।
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रुद्रपुर तहसील क्षेत्र में करीब तीस जेसीबी अवैध मिट्टी खनन के धंधे में लगी है।

मदनपुर, गौरीबाजार और एकौना क्षेत्र में मिट्टी के धंधेबाज फैले हैं। एक जेसीबी पर मिट्टी की ढुलाई करने के लिए छह ट्रॉलियां लगाई जाती हैं। अधिकांश जगहों पर रात में आठ बजे से सुबह तक खनन का धंधा चलता है। गोर्रा नदी और बांध के बीच में कई जगहों पर खनन होने से खतरनाक स्थिति हो गई है। गोर्रा नदी के किनारे सुल्तानी, पलिया, भेलऊर, पचलड़ी आदि जगहों पर नदी और बांध के बीच खनन का काम चलता है। हालांकि, सिंचाई विभाग ने इन जगहों पर खनन कराने से रोक लगा रखी है। कई बार लोगों के द्वारा खनन की सूचना देने पर पुलिस मिट्टी लदी ट्राली थाने उठवा ले जाती है। धंधेबाजों की ऊंची रसूख के नाते अगले दिन फिर काम शुरू हो जाता है। क्षेत्र में अवैध खनन यदि ऐसे ही जारी रहा तो नदी के पानी का दायरा बढ़ जाएगा। बाढ़ का पानी बढ़ने पर बंधों पर खतरा अधिक होने लगेगा।

खनन माफिया पर अंकुश नहीं लग पा रहा 

सलेमपुर।  प्रदूषण से नदियां जहां सिकुड़ती जा रहा रही हैं। वहीं, माफिया बेखौफ बालू का खनन करा रहे हैं। राजनीतिक लोगों की दखलअंदाजी की वजह से पुलिस प्रशासन भी इन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। पूरी रात नगर से लेकर देहातों की सड़कों पर दौड़ती बालू लदीं ट्रॉलियां और ट्रक इसकी गवाही दे रही है। 
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डेंजर जोन होने के बावजूद भी जिले में घाघरा और छोटी गंडक नदियों में बालू का खनन तेजी से हो रहा है। सरयू नदी के किनारे रात के अंधेरे में माफिया बालू की खनन करा रहे हैं। सरयू नदी से भागलपुर इलाके में और सलेमपुर के नदावरघाट पर छोटी गंडक नदी से दिन और रात में बालू निकाला जा रहा है। इसके अलावा लार के पिंडी, नदौली, भटनी और भाटपाररानी इलाकों में भी बालू का खनन रात में हो रहा है। खनन होने से जहां नदियों के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है। वहीं, बाढ़ का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। इसमें  सत्तासीन लोगों के अलावा स्थानीय पुलिस की मिलीभगत भी है। यही वजह है कि खनन माफियों पर कार्रवाई करने से अफसर भी कतरा रहे हैं। खनन से तटबंध भी अछूते नहीं है, जिसकी वजह से गर्मी में पानी के लिए तरसाने वाली नदियां बरसात में भी बाढ़ से रुलाती हैं। 

-बालू खनन से जहां बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, तटबंध कमजोर हो जाते हैं।  बाढ़  का जो इलाका है। उसमें तो किसी भी प्रकार का कोई खनन नहीं होना चाहिए। इससे नदियों के साथ-साथ तटवर्ती इलाके के लोगों का नुकसान है। घाघरा नदी की तबाही से बरहज इलाके का कुरह परसिया गांव अपना अस्तित्व खो चुका है। 
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- वेदप्रकाश, रिटायर्ड प्राध्यापक, भूगोल, एसडीपीजी कॉलेज मठलार।
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