67 के बजाय 36 करोड़ में ही हो जाएगा गरीबों का कल्याण
देवरिया। गरीब कल्याण रोजगार अभियान की मियाद एक सप्ताह में पूरी हो जाएगी। विभागों को जो लक्ष्य मिले थे कई ने उससे बढ़-चढ़कर प्रगति दर्ज कराई है। 125 दिन की कार्ययोजना के ज्यादातर काम पूरे भी हो चुके हैं। अधूरा है तो बजट खर्च और रोजगार का लक्ष्य। शासन से मनरेगा के लिए निर्धारित खर्च के आधे में ही जिम्मेदार गरीबों का कल्याण करने की तैयारी में हैं।
20 जून को प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत की थी। अभियान का मकसद कोरोना महामारी से प्रभावित गरीब परिवारों को संकट से उबारना था। लॉकडाउन के बाद घर लौटे प्रवासी मजदूरों को मनरेगा से जोड़कर रोजगार देना था। लेकिन जिम्मेदारों की सुस्ती ने अभियान पर पानी फेर दिया। 125 दिन की कार्ययोजना पर मनरेगा से जो 67.54 करोड़ रुपये खर्च होने थे उसके सापेक्ष 118 दिन में विभाग ने 36.64 करोड़ रुपये ही खर्च किया है। धनराशि खर्च नहीं होने का असर गरीबों के रोजगार पर पड़ा है। जिले में 24.28 लाख के सापेक्ष 13.28 लाख मानव दिवस सृजित हो पाए हैं।
कार्ययोजना की प्रगति एक नजर में
कार्य लक्ष्य पूर्ति
जल संरक्षण 1474 1150
वृक्षारोपण 1202 1276
पशु आश्रय 119 134
बकरी आश्रय 41 61
मुर्गी आश्रय शून्य 06
वर्मी कंपोस्ट 08 10
उद्यान 55 58
तालाब 217 154
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 28 31
सामूदायिक शौचालय 1189 304
पंचायत भवन 647 08
आंगनबाड़ी केंद्र 41 61
अभियान में शामिल हैं ये विभाग
गरीब कल्याण रोजगार अभियान में ग्राम्य विकास विभाग, पंचायतराज विभाग, वन विभाग, मनरेगा, रेलवे, पीडब्लपूडी, कृषि विभाग, बीएसएनएल, खनन विभाग शामिल हैं। इन विभागों में कन्वजेंस के माध्यम से मनरेगा श्रमिकों को रोजगार दिया जाना है।पौधरोपण, सड़क मरम्मत, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद निर्माण में मनरेगा से मजदूरी व मैटेरियल भुगतान किया जाता है।
अत्यधिक बारिश के चलते कार्य प्रभावित हुए हैं। जो भी समय शेष है, उसमें लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। तमाम कार्य अंतिम चरण में हैं। इनका मैटेरियल भुगतान होने के बाद व्यय बढ़ जाएगा।
शिव शरणप्पा, सीडीओ