मईल। मुरारबारी गांव निवासी विवेक यादव भोपाल में जाली नोट छापने का काम करता था, यह सुनकर गांव वाले हतप्रभ हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए इस युवक का गांव से लगाव बहुत कम था। वह अपने पिता मनोज यादव के साथ लंबे समय से भोपाल में ही रहता था। पिता किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। बीते रक्षाबंधन पर वह तीन साल बाद गांव आया था।
गांव में उसकी मां संगीता देवी और एक छोटी बहन ही रहती है। घर देखकर भी कोई यह नहीं कह सकता है कि वह जाली नोट छापने का काम करता होगा। गांव के लोगों का कहना है कि विवेक यहां सबसे बड़े अदब से मिलता था। उसके जाली नोट छापने और गिरफ्तार होने की बात पर सहसा लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा था। वहीं मां संगीता देवी का कहना कि उनका बेटा ऐसा काम नहीं कर सकता है। एसओ मईल राकेश सिंह ने बताया कि यहां उसके खिलाफ कोई अपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
प्रिंटिंग प्रेस में नौकरी करता था आरोपी विवेक
बता दें कि 14 नवंबर को भोपाल पुलिस को जानकारी मिली थी कि काले रंग की शर्ट पहने एक युवक निजामुद्दीन इलाके में 500-500 रुपये के नकली नोटों के साथ खपाने की नीयत से घूम रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर संदिग्ध युवक को दबोच लिया। पूछताछ में उसकी पहचान विवेक यादव निवासी मईल थाना जिला देवरिया के रूप में हुई। वह भोपाल के करोंद इलाके में रहता था, वहां तलाशी लेने पर उसके पास 500-500 रुपये के 23 नकली नोट मिले, जो पहली नजर में एकदम असली जैसे नजर आते थे। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल चेक किया तो उसमें नकली नोट बनाने से जुड़े कई वीडियो मिले।आरोपी इन वीडियो को बार-बार देखता था।आरोपित विवेक पहले प्रिंटिंग प्रेस में कार्य करता था वहीं से उसे नकली नोट छापने का आइडिया आया। नकली नोट बनाने के लिए वह खास तरह का कागज ऑनलाइन मंगाता था। इन कागजों को ब्लेड से काटकर पेंसिल से मार्किंग करता था। इसके बाद दूसरे कागज पर आरबीआई की पट्टी चिपकाकर दोनों कागजों को आपस में जोड़ देता था। प्रिंटर से नोट का प्रिंट निकालकर उसे कटिंग के जरिए नोट के आकार में तैयार करता था। अंत में वॉटर मार्क की डिटेल जोड़कर नकली नोट को असली बना देता था।