बरहज। थाना घाट की पक्की सीढि़यों से होकर बहने वाली सरयू नदी की मुख्य धारा अब करीब दो किमी दक्षिण परसियां-विशुनपुर देवार के अलावा मऊ जनपद के बिनटोलिया गांव तक पहुंच गई है। इससे बिनटोलिया गांव के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। अधूरे मोहन सेतु निर्माण की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही है।
नदी की धारा परिवर्तन की मुख्य वजह लोग गोरखपुर और देवरिया बाॅर्डर पर अवैध खनन बता रहे हैं। वर्ष 2007 से 2014 तक सरयू नदी के किनारे हुए बेतहाशा कटान में कुरह परसियां और गोरखपुर जनपद के कोलखास गांव का अस्तित्व पहले ही समाप्त हो चुका है। उग्रसेन सेतु, रामजानकी मार्ग के अलावा तटवर्ती गांवों के अस्तित्व पर भी खतरा बढ़ गया था।
बाढ़ खंड की केंद्रीय तकनीकी टीम ने कटान क्षेत्र का दौरा कर नदी के हालात को देखते हुए कपरवार संगम तट से भागलपुर पुल तक डेंजर जोन घोषित कर दिया है।
ग्रामीण ज्ञानेश्वर सिंह, अखिलेश सिंह, जवाहिर यादव, रमाशंकर आदि का कहना है कि अवैध बालू खनन के चलते ही सरयू की धारा में परिवर्तन होने लगा।
कटान के चलते नदी दक्षिण की ओर से बहने लगी। पक्के घाट की सीढि़यों से नदी के दूर चले जाने से बरसात के मौसम को छोड़ आम दिनों में सरयू बरहज कस्बे से करीब दो किमी दूर बहती है।
बेतहाशा कटान के चलते अधूरा रह गया मोहन सेतु : नगर के सरयू तट पर परसियां-विशुनपुर देवार के अलावा मऊ जनपद के लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए 2013 में सरयू नदी पर मोहन सेतु का निर्माण कार्य शुरू कराया गया।
इसे 2017-18 में बनकर तैयार हो जाना था। सरयू की धारा परिवर्तन से नदी का पाट चौड़ा होने के कारण पुल के निर्माण कार्य में बाधा आ गई। 12.08 किमी लंबा, 7.5 मीटर चौड़ा और 11.33 मीटर ऊंचे पुल का निर्माण 39 पिलरों पर कराया जाना था मगर किनारे की चौड़ाई बढ़ने के बाद 29 करोड़ का रिवाइज स्टीमेट मिलने पर पुल के बचे हिस्से का निर्माण कार्य शुरू कराया गया।
जब तक दोबारा काम शुरू हुआ, कटान के कारण नदी का पाट 200-250 मीटर चौड़ा हो गया। इससे पुल निर्माण कार्य अधर में ही लटक गया। रूड़की के प्रो. जुल्फिकार अली की टीम ने मॉडल स्टडी भी किया था जिसमें 39 की जगह चार, जबकि वर्तमान में 10 पाया बढ़ाने की कवायद किया जा रहा है।