देवरिया। जिले के विभिन्न थानों पर पहुंचने वाले पीड़ितों की तहरीर बिना चढ़ावे के नहीं लिखी जाती है। मुकदमा तो दूर की बात है, जब पीड़ित थाने पहुंचता है तो उसे चाय-पान की दुकान पर बैठे लोगों के पास पुलिसकर्मी भेज देते हैं। मारपीट, छेड़खानी सहित विभिन्न धाराओं के हिसाब से तहरीर लिखने का खुलेआम चढ़ावा लिया जा रहा है।
कोतवाली, थाना या महिला थाना हर जगह बाहर ऐसे लोगों का जमवाड़ा रह रहा है। जहां पर तहरीर लिखने के बदले कम पढ़े-लिखे फरियादियों से रकम ली जा रही है। तहरीर लिखने वाले धारा के हिसाब से रुपये लेते हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि सदर कोतवाली में दिनभर में पड़ने वाली तहरीरों में से तीन से पांच तहरीरें ऐसी होती हैं जिनकी लिखावट एक ही व्यक्ति की होती है। यही हाल महिला थाने और सलेमपुर का भी है। यहां तक की कई थानों के होमगार्ड भी इस खेल में संलिप्त हैं। वह आने-जाने वाले फरियादियों पर नजर गड़ाए रखते हैं।
यह है रेट-
- केवल मारपीट- 20 रुपये
- गंभीर रूप से मारपीट- 50 रुपये
- छेड़खानी और दुष्कर्म जैसे मामपे - 100 रुपये
- दहेज उत्पीड़न - 50 रुपये
- दलित उत्पीड़न- 50 रुपये
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हो जाता है धाराओं में खेल, गंभीर मामलों में लिखते हैं हल्की तहरीर
देवरिया। विभिन्न थानों में तैनात मुंशी को जब पता चलता है कि कोई मामला गंभीर है और लूट, चोरी की धाराओं में फरियादी मुकदमा लिखवाना चाहता है तो बाहर बैठे व्यक्ति के पास थाने से फोन पहुंच जाता है। इसके बाद तहरीर में लूटपाट, चोरी जैसी बातें गायब कर दी जाती हैं। इसके कारण कम पढ़े-लिखे लोगों की तहरीर उसी हिसाब लिखकर थाने में बैठे मुंशी के पास भेजवा दी जाती है।
थाने पर जाने पर एक दुकानदार के पास भेजा गया। उसने पचास रुपये लिए। इसके बाद तहरीर लिखी गई। इसके बाद ऑफिस में जाकर तहरीर दी। - महिला थाने आई कमलावती
मारपीट का मामला था। कोतवाली के पास एक दुकान पर भेजा गया, वहां से कागज लेकर आए और तहरीर लिखने के बदले पचास रुपये ले लिए गए। मुंशी ने खुद ही दुकान पर भेजा था।
- मनोज कुमार
तहरीर लिखने के बदले अगर कोई पुलिसकर्मी रुपये मांगता है तो उसकी शिकायत करें। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। थानों के बाहर बैठा कोई व्यक्ति अगर ऐसा काम कर रहा है तो उसकी पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश कुमार, एएसपी