संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया/लार। जिले की प्रमुख सड़कों के किनारे लगे झुके और सूखे पेड़ अब राहगीरों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। तेज हवा या हल्की बारिश के दौरान ये पेड़ अचानक गिर जाते हैं। गुजरते वाहनों या पैदल चलने वालों को अपनी चपेट में ले लेते हैं।
ताजा हादसों में पिछले एक सप्ताह में लार और मईल क्षेत्र में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन पेड़ों को कटवाने के लिए कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग और प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई की गई होती तो ये हादसे टाले जा सकते थे।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द इन पेड़ों को नहीं हटाया गया तो आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा। जानकार बताते हैं कि इन पेड़ों को करीब 20-25 साल पहले वन विभाग ने रामजानकी मार्ग, लार-सलेमपुर मार्ग, बरहज-देवरिया मार्ग और भागलपुर-सलेमपुर मार्ग के किनारे लगवाया था।
अब इनमें से कई पेड़ या तो सूख चुके हैं या सड़क चौड़ीकरण के दौरान जड़ों का बड़ा हिस्सा कट जाने से असंतुलित होकर सड़क की ओर झुक गए हैं। कई की जड़ें इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि तेज हवा में गिरना तय है।रामजानकी मार्ग पर गयागीर वार्ड के सामने जहां संतोष और शिवा की मौत हुई थी, उसके दक्षिण में भी एक पेड़ खतरनाक तरीके से सड़क की ओर झुका हुआ है।
पिपरा चौराहा के पास रमावती धर्मनाथ इंटर कॉलेज के सामने भी एक आम का पेड़ झुका हुआ है, जिसकी टहनियां हवा चलने पर टूटकर गिरती रहती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन पेड़ों के खतरे को लेकर कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें संबंधित अधिकारियों को दी गईं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
उधर, वन दरोगा अनिल सिंह ने कहा कि कई पेड़ों को काटने के प्रस्ताव पहले ही भेजे गए हैं। इसकी विभागीय प्रक्रिया चल रही है। इसमें कुछ समय लग रहा है।