रुद्रपुर में महज आठ सचिव संभाल रहे 80 गांव, आठ ईओं के जिम्मे 17 नगर निकाय
सचिवों की कमी से प्रभावित हो रहे विकास कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। जिले में व्यापक तबादला का गांव और नगरों के विकास पर असर पड़ने लगा है। ग्राम विकास विभाग और नगर निकायों में हुए तबादले की तुलना में नई पोस्टिंग कम होने से गांव और नगर पंचायतों में विकास की रफ्तार धीमी हो गई है। जिले में 15 नगर पंचायत और दो नगर पालिका को चलाने के लिए सिर्फ आठ अधिशासी अधिकारी मौजूद हैं। यही हाल ग्राम पंचायतों में तैनात ग्राम सचिवों का है। रुद्रपुर ब्लाॅक में 80 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के संचालन के लिए महज आठ सचिव मौजूद हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकार की ज्यादातर महत्वाकांक्षी विकास योजनाएं गांवों में चल रही हैं। ऐसे में एक सचिव को करीब दस गांवों के विकास कार्यों के संचालन का भार उठाना पड़ेगा। गांव में कायाकल्प योजना से लेकर सामुदायिक शौचालय, पीएम आवास, जल जीवन मिशन, अमृत सरोवर जैसी तमाम योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कत होने लगी है। मनरेगा से हुए कार्यों का भुगतान भी समय से नहीं हो रहा है। रुद्रपुर ब्लाक के 86 गांवों में से छह गांव मदनपुर को नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद नगर पंचायत में मर्ज हो गए। मदनपुर नगर पंचायत तो बन गया, लेकिन ग्राम पंचायत का अभिलेख अभी ब्लाॅक मुख्यालय में पड़ा है। यहां नगर पंचायत का कार्यालय अभी संचालित नहीं हो रहा है। इस कारण लोगों को जन्म और मृत्यु रजिस्टर का नकल तक नहीं मिल पा रहा है। जिले में आठ अधिशासी अधिकारियों को दो से तीन निकायों का कार्य बांट दिया गया है। लोगों का आरोप है कि ईओ नगर पंचायत कार्यालय में पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। रुद्रपुर ब्लाक के प्रधान संघ के अध्यक्ष राजीवन सिंह, सेमरौना के प्रधान शैलेष यादव, करहकोल के प्रधान अखंड प्रताप सिंह, गोरख पासवान, अनिरुद्ध चौधरी, अनिल सिंह आदि ने कहा कि सचिवों की किल्लत से ग्राम सचिवालय बंद पड़े हैं। गांव में विकास कार्यों की रूपरेखा बनाने के लिए बैठक तक नहीं हो पा रही है। आठ सचिव पर 80 गांव का भार ढोना मुश्किल हो गया है। प्रधानों ने सचिव की संख्या बढ़ाने की मांग की। बीडीओ राजीव गुप्ता ने कहा कि मैन पावर बढ़ाने की जिले के आला अधिकारियों से मांग की जाएगी। अन्य जिलों से तबादला होकर आ रहे कर्मचारी कार्यभार ग्रहण कर रहे हैं।