रुद्रपुर/देवरिया। फतेहपुर गांव के लेहड़ा टोला में सामूहिक हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कर्मचारियों और अफसरों की लापरवाही की परतें भी उघड़ने लगी हैं। समाधान दिवसों से लेकर आईजीआरएस तक सत्यप्रकाश की बार-बार शिकायतों पर अफसरों ने वही देखा-सुना, जो उनके मातहतों ने दिखाया और बताया। नतीजा यह हुआ कि इतना बड़ा हत्याकांड हो गया।
सामूहिक हत्याकांड के संबंध में शासन को भेजी गई रिपोर्ट में राजस्वकर्मियों और स्थानीय पुलिस की कई स्तर पर खामियां मिलीं हैं। सामने आया है कि सभी शिकायतों का निस्तारण केवल कागज में ही कर रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी गई। यहां तक कि पाबंद करने के बाद भी निजी मुचलका तक नहीं भरवाया गया, वहीं पुलिस ने चालानी रिपोर्ट में भी खानापूरी कर दी। एक रिपोर्ट में तो यह भी बताया गया है कि शांतिभंग में चालान किया गया है, लेकिन यह बात गलत निकली। इस पूरे मामले में निचले स्तर के कर्मचारियों पर भरोसा कर अफसर भी फंसते नजर आ रहे हैं।
अधिकांश अधिकारियों को आईजीआरएस के मामलों के निस्तारण में खामियां उजागर होने पर निलंबन की कार्रवाई झेलनी पड़ रही है। 25 दिसंबर 2022 को जनसुनवाई पोर्टल की शिकायत पर फर्जी रिपोर्ट लगाई गई है। इतना ही नहीं, 60 दिन बाद चार मार्च को मौके पर कर्मचारियों को भेजा गया, जबकि मुख्यमंत्री से संदर्भित मामले जिले पर आने के बाद एसडीएम के माध्यम से जाते हैं और 15 दिन के भीतर ही निस्तारण कर दिया जाना चाहिए था।
इसी जांच की रिपोर्ट लगाने में दो एसडीएम, सीओ, तहसीलदार, लेखपाल की लापरवाही मिली। समाधान दिवस पर जब उन्होंने फरियाद सुनाई तो तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक और हलका दरोगा की मध्यस्थता से सुलह करा दी गई। राजस्व विभाग ने रिपोर्ट लगा दी। सत्यप्रकाश दूबे ने सात फरवरी 2023 को आईजीआरएस पर ज्ञान प्रकाश दूबे उर्फ साधुशरण के संपूर्ण हिस्से की जमीन प्रेम यादव और रामजी यादव ने 2014 में जबरन बैनामा खारिज कराने की शिकायत की थी।
इसमें भी प्रभारी निरीक्षक ने भूमि संबंधी प्रकरण होने का हवाला देते हुए बताया कि मामला दीवानी न्यायालय में है। सत्यप्रकाश ने भूमि पैमाइश कराने के लिए आवेदन किया था। इसका निस्तारण कोर्ट में मुकदमा होने का हवाला देकर कर दिया गया।
इसके अलावा जांच रिपोर्ट में यह बताया गया है कि आईजीआरएस पर मिली शिकायतों की एसडीएम योगेश कुमार गौड़ ने समयबद्ध तरीका से जांच नहीं कराई और निचले स्तर से गलत रिपोर्ट लगा दी गई। सीओ जिलाजीत ने आईजीआरएस पर लंबित सत्यप्रकाश के जानमाल के खतरे के आवेदन को काफी दिनों तक लंबित रखा और हलका सिपाही ने आवेदन पर आख्या दी कि जानमाल का कोई खतरा नहीं और न ही कोई विवाद है, जबकि विवाद प्रेम यादव से चला आ रहा था।
जुलाई 2022 और फरवरी 2023 पर तहसील दिवस पर सत्यप्रकाश ने प्रार्थनापत्र देकर भूमि विवाद के निस्तारण की गुहार लगाई थी। इसमें लेखपाल ने प्रार्थना पत्र पर जांच कर रिपोर्ट लगा दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि ग्राम सभा की जमीन पर प्रेम यादव का कब्जा है। जब उनकी मां चिंता देवी ग्राम प्रधान थीं तभी से उन्होंने गांव के खलिहान, नवीन परती आदि पर अवैध कब्जा किया है। इसमें भी हल्का लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने गलत रिपोर्ट लगाई। इस पर एसडीएम ने भी आख्या रिपोर्ट लगाकर प्रमुख सचिव गृह को प्रेषित कर दिया।
इस लापरवाही के कारण हल्का लेखपाल से लेकर तीन एसडीएम, दो सीओ सहित दो कोतवाल को कार्रवाई झेलनी पड़ी। फतेहपुर कांड में रुद्रपुर के एसडीएम योगेश कुमार गौड़ और तहसीलदार केशव कुमार को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि इन दोनों अधिकारियाें ने घटना के पांच दिन पहले ही कार्यभार ग्रहण किया था। आईजीआरएस के संदर्भों के निस्तारण में लापरवाही का उत्तरदायी पाए जाने पर पूर्व में एसडीएम रहे रामविलास, ओमप्रकाश, ध्रुव शुक्ला और संजीव कुमार उपाध्याय के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई चल रही है। वहीं सेवानिवृत्त तहसीलदार वंशराज राम, अभयराज और रामाश्रय पर भी विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है।