देवरिया। गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के बगल में बने मजार को बिना नक्शा पास कराए बनाए जाने की शिकायत पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने शनिवार को मजार पक्ष से नक्शा स्वीकृति के संबंध में सबूत पेश करने के निर्देश दिए थे, लेकिन मजार पक्ष कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। अब इस पर सोमवार को नियत प्राधिकारी कोर्ट अपना फैसला सुनाएंगे।
गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के बगल में स्थित मजार को लेकर वर्ष 2019 में भाजपा नेता नवीन सिंह, श्रीनिवास मणि, मारकंडेय प्रसाद तिवारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजन यादव, अंबिकेश पांडेय समेत कई लोगों ने तत्कालीन जिलाधिकारी से शिकायत कर इसे सरकारी भूमि पर और बिना नक्शे के निर्मित होना बताया।
तब डीएम ने आरबीओ जेई, तहसीलदार, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से मौका मुआयना करवाया। इस संबंध में तत्कालीन आरबीओ जेई ने नियत प्राधिकारी के कोर्ट में आरबीओ एक्ट की धारा-10 के तहत वाद दायर किया।
इस मामले में लगातार सुनवाई के बाद शुक्रवार को नियत प्राधिकारी व एसडीएम सदर श्रुति शर्मा की कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। वहीं मजार पक्ष को निर्माण की स्वीकृति के संबंध में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए शनिवार की शाम का समय दिया था।
समय सीमा बीत जाने के बाद भी मजार पक्ष कोई स्वीकृति पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका।
अब सोमवार को कोर्ट खुलने के बाद इस पर नियत प्राधिकारी अपना निर्णय सुनाएंगी।
सदर विधायक के हस्तक्षेप के बाद आई तेजी : मजार प्रकरण में सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी द्वारा मुख्यमंत्री को शिकायत किए जाने के बाद इस मामले में तेजी आई।
इसके बाद से लगातार सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जमीन के मामले में अपना फैसला सुना दिया है। वहीं बिना नक्शा पास कराए मजार बनाए जाने के मामले में सोमवार को नियत प्राधिकारी कोर्ट से फैसला आने की उम्मीद है।
इधर, देर शाम एसडीएम और तहसीलदार के अगुवाई में राजस्व टीम ने मजार की पैमाइश की। इस कार्रवाई के बाद दोनों अवसर जिला अधिकारी के पास पूरे मामले की रिपोर्ट लेकर पहुंचे। गोरखपुर रोड स्थित ओवरब्रिज के पास बने मजार को लेकर विवाद चल रहा है। मजार जिस जमीन पर बना है, उसे वापस राजस्व रिकॉर्ड में बंजर घोषित कर दिया गया है।