देवरिया। महायोजना 2031 लागू होने के पहले ही आपत्तियों के पेच में उलझ गई है। कंसल्टेंट एजेंसी की लापरवाही के कारण योजना को लागू करने में तीन महीने की देरी हो चुकी है। आपत्तियों के निराकरण और सुझाव पर अमल लेने को लेकर एजेंसी रुचि नहीं दिखा रही है। इस वजह से शहर के विकास की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। जबकि डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने करीब एक माह पहले शासन को पत्र भेज कर एजेंसी की लापरवाही के बारे में बताया था।
विनियमित क्षेत्र की महायोजना-2031 दिसंबर 2022 में ही लागू हो जानी थी। इसकी खामियों को दूर करने के लिए जून माह आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। करीब 532 लोगों ने अपनी-अपनी बात रखी है। इस पर नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में जिलाधिकारी की कमेटी ने आपत्तियों और सुझावों को सुनकर एजेंसी को नए तरीके से मानचित्र सहित अन्य कार्य करने के लिए सौंप दिया। ढाई माह का समय गुजर गया लेकिन अभी तक कंसल्टेट एजेंसी ने एक कदम कार्य को आगे नहीं बढ़ाया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार एजेंसी ने पूर्वांचल के करीब 10 जनपदों का काम ले रखा है। अधिकतर जनपदों में एजेंसी की लापरवाही सामने आ रही है। हालांकि इस कार्य के लिए एजेसी को मोटी रकम का भुगतान भी किया जा चुका है।
योजना धरातल पर उतरे तो शहर को मिलेंगे दो बाईपास मार्ग
देवरिया। महायोजना में बैतालपुर से रुद्रपुर जाने वाले मार्ग तक और बैतालपुर से कसया मार्ग तक दो बाईपास सड़कों का निर्माण कराया जाना है। साथ ही 34 से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण, नए पार्कों, आवासीय कॉलोनियां, व्यावसायिक भवन, औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाना है।पर लेटलतीफ होने के कारण अभी तक यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है। संवाद
नक्शा नहीं हो पा रहा है मंजूूर
देवरिया। शहरवासियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) के अनुरूप महायोजना के प्रारूप को अंतिम रूप देकर तैयार कराया गया है। इसे 4.50 लाख शहरी आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें साढ़े चार हजार हेक्टेयर भू-क्षेत्र शामिल किया गया है। विकसित क्षेत्र का दायरा बढ़कर इस समय शहर के पास स्थित गांवों तक पहुंच गया है। मास्टर प्लान के दायरे में 71 राजस्व गांव हैं। महायोजना के चक्कर में लोगों को दिक्कतों का सामना करन पड़ रहा है। कई ऐसे क्षेत्र जहां पर, हरित क्षेत्र, व्यवसायिक, गोदाम और अन्य कार्य के लिए भूमि के उपयोग का प्रस्ताव है। इसके कारण पहले से भूमि लेने वालों के भी मानचित्र स्वीकृत नहीं हो रहे है। इस वजह से लोग अपना घर नहीं बना पा रहे है। संवाद
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कोट
एजेंसी से वार्ता हुई है। इसी माह आपत्तियों की निराकरण आख्या तैयार करते हुए बदलाव कर दिया जाएगा। शासन को भी पत्र भेजा जा चुका है।
- हितेश कुमार, टाउन प्लानर