देवरिया। शहर के सिविल लाइन में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन भक्ति, विरह की कथा हुई। कथा का रसपान कर श्रद्धालु आनंद से भर गए। पंडाल हर्षध्वनि से गूंजता रहा।
बृहस्पतिवार को सुदामा चरित्र एवं श्रीमद् भागवत पूजन की कथा होगी। कथा पं. जितेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने गोपी उद्धव संवाद के माध्यम से भक्ति की गहराई, कंस मर्दन के माध्यम से धर्म की विजय, और रुक्मणी मंगल के माध्यम से प्रेम, धैर्य और समर्पण की शक्ति का संदेश दिया। कथा का रसपान कराते हुए कथा वाचक ने कहा कि उद्धव और गोपियों का संवाद केवल शब्द नहीं, आत्मा और परमात्मा का मिलन है।
गोपियों का प्रेम न लौकिक है न सीमित। वह भक्ति का अमृत है, जो हृदय को ईश्वर के समीप ले जाता है। कथाव्यास ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहाकि कंस मर्दन केवल एक युद्ध नहीं, यह जीवन का शाश्वत सिद्धांत है। जब अधर्म बढ़ता है, तब धर्म स्वयं प्रकट होता है। कथा के इस प्रसंग में “जय श्रीकृष्ण” और “हरि बोल” के उद्घोष से पूरा पंडाल गुंजायमान हो उठा।
उन्होंने रुक्मिणी विवाह का दिव्य प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रुक्मणी का प्रेम केवल विवाह नहीं, यह भक्ति का स्वरूप था, जिसमें धैर्य, समर्पण और सत्य का मिलन होता है।” पं. शास्त्री ने कहा कि जिनके जीवन में माता-पिता का आशीर्वाद है, उनके लिए यह जीवन स्वयं एक भागवत है। माता-पिता के आशीर्वाद से ही जीवन में भक्ति का प्रकाश स्थायी रहता है।