जिले में महज दो एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज में ही तीन की जरूरत
दलाल और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को पहुंचा दिया जाता है निजी और अवैध अस्पताल
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में गर्भवती को ऑपरेशन के दौरान एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) देने और उनकी निगरानी करने वाले प्रशिक्षित चिकित्सक (एनेस्थिसियोलॉजिस्ट) का टोटा है। यहां एनेस्थिसियोलॉजिस्ट (बेहोश करने वाला डॉक्टर) के तौर पर महज एक डॉक्टर की तैनाती है। जबकि 24 घंटे ओटी के लिए तीन एनेस्थिसियोलॉजिस्ट की जरूरत बताई जा रही है। ऐसे में एनेस्थिसियोलॉजिस्ट की ड्यूटी पूरी होने के बाद गर्भवती महिलाओं को रेफर करना पड़ता है। इसका फायदा निजी और अवैध अस्पताल उठाते हैं। दलाल और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को निजी और अवैध अस्पतालों में पहुंचा दिया जाता है, जहां अधिक धन खर्च करना पड़ता है। कुछ की तो जान पर बन आती है।
मेडिकल कॉलेज में चौबीस घंटे गर्भवती के आपरेशन की सुविधा नहीं है। यहां हर रोज करीब पांच से छह आपरेशन होते हैं। इसे बाद आने वाली गर्भवती को सिजेरियन की जरूरत पड़ने पर लौटा दिया जाता है। मरीजों को दलाल बेहतर इलाज की सुविधा बताकर निजी अस्पताल तो कुछ को अवैध अस्पतालों में पहुंचा देते हैं। यहीं वजह है कि शहर के गली-मोहल्लों में अवैध तरीके से संचालित होने वाले अस्पताल फल फूल रहे हैं। सूत्रों की माने तो सरकारी अस्पतालों के बेहोशी के डॉक्टर और कुछ सर्जन निजी अस्पतालों में जाकर गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन करते हैं। जिनकी सेटिंग मेडिकल कॉलेज से ही दलालों के माध्यम से हो जाती है।
सीएचसी पर भी नहीं हैं सुविधाए
देवरिया। जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुद्रपुर, सलेमपर, बरहज, भटनी व गौरीबाजार में गर्भवतियों के आपरेशन की सुविधा का दावा किया जाता है। लेकिन पूरे जिले में महज दो एनेस्थिसियोलॉजिस्ट ही उपलब्ध है। इसमें एक की रुद्रपुर और एक की मुख्यालय पर तैनाती है। उन्हें जरूरत पड़ने ऑन काल भेजा जाता है। इन केंद्रों पर हर दिन आपरेशन नहीं होता है। इमरजेंसी में सुविधा नहीं मिल पाती है। मरीजों को आपरेशन के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। रविवार को बेहोशी डाक्टर न मिलने से ऑपरेशन का कार्य ठप रहता है। भटनी में सीएचसी पर ऑपरेशन से डिलीवरी की सुविधा सप्ताह में सिर्फ एक दिन (मंगलवार) है। अन्य दिनों में आपरेशन के लिए गर्भवती को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. धनंजय कुशवाहा ने बताया कि सर्जन डॉक्टर मसूद आलम की ड्यूटी जिले के अन्य अस्पतालों में भी लगाई जाती है। इसीलिए मंगलवार को भटनी सीएचसी में सीजर की सुविधा मिल पाती है। सीएचसी गौरी बाजार में आठ दिसंबर से आपरेशन की सुविधा शुरू हुई है। अब तक मात्र एक आपरेशन हुआ है।
जिले में गर्भवती के आपरेशन की सुविधा पांच सीएचसी पर है। बेहोशी के डॉक्टर की कमी है। अभी दो ही डॉक्टर हैं। एक की रुद्रपुर में तैनाती है, जबकि दूसरे मुख्यालय पर हैं, उन्हें जिस सीएचसी पर जरूरत पड़ती है, भेजा जाता है। बेहोशी के डॉक्टर और सर्जन के लिए डिमांड की गई है। - डॉ. संजय चंद, एसीएमओ व नोडल अधिकारी
मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में सुविधाएं हैं। गर्भवती के आपरेशन हर रोज किए जाते हैं। बेहोशी के डॉक्टर की कमी के कारण चौबीस घंटे की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है। आशा और अन्य कर्मचारियों के मरीजों के बरगलाने की शिकायत पर सख्त कार्रवाई की जाती है।
डॉ. एचके मिश्र, सीएमएस
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