गड्ढों में आम जनता खा रही हिचकोले
देवरिया। ये देवरिया शहर है जनाब! यहां ओहदे के हिसाब से विकास तराशे जाते हैं। सड़कों के विकास का पैमाना देखना हो तो स्टेडियम के इर्द-गिर्द बने जिले के आला अधिकारियों के आवास घूम आइए। यहां से उनके दफ्तर तक की सड़कें जितनी चकाचक हैं, आम जनता की राहें उतनी ही खराब। उबड़-खाबड़ सड़कों पर गिरकर अस्पताल पहुंचकर इलाज कराना राहगीरों की नियति बन चुकी है। बुधवार को ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में विकास के दो चेहरे दिखाई दिए।
शहर में सड़कों की तादात करीब आठ सौ है। दो दर्जन से अधिक मुख्य मार्ग हैं। छोटे बड़े नाले-नालियों की संख्या भी सैकड़ों में है। इनसे सहूलियत कितनी मिलती है यह पूछने पर आम आदमी को गुस्सा आ रहा है। लोग सड़क, नाली निर्माण के लिए अधिकारी व नेताओं से कह-कहकर थक चुके हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही। बजट नहीं होने की दलील देकर अधिकारी पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि अफसर कॉलोनी में बजट नहीं मिलने जैसी कोई समस्या नहीं है। सड़क से लगायत नालियां एकदम चकाचक हैं। स्टेडियम के पास पांच सौ मीटर के दायरे में करीब दो दर्जन अधिकारियों के आवास हैं। पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता वीवी सिंह, एक्सईएन अशोक कुमार समेत तमाम इंजीनियर यहीं रहते हैं। इनके अलावा सीडीओ, एसपी, एडीएम प्रशासन, सीओ, सीएमओ, मुख्य राजस्व अधिकारी आदि का आवास यहीं है। यहां की सड़कों पर ना ही एक भी गड्ढे हैं और ना ही नालियों में सिल्ट। इसके ठीक बगल में ट्यूबेल कॉलोनी से साकेत नगर जाने वाली सड़क, शहीद गेट से रामनाथ देवरिया जाने वाली सड़क, हनुमान मंदिर से रामनाथ देवरिया, हनुमान मंदिर से कैलाशपुरी मोहल्ले, प्रेस्टिज स्कूल से सीसी रोड, छौमुखी चौराहा, रामगुलाम टोला सहित बीस से अधिक सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। ऐसे में यह सड़कें विकास के दो चहेरे बया कर रही हैं।
सोशल मीडिया से दिखाता हूं मोहल्ले की समस्या
रामनाथ देवरिया के सुनील मणि त्रिपाठी का कहना है कि शहीद गेट से रामनाथ देवरिया मोहल्ले को जाने वाली सड़क कई साल से खराब है। इसकी शिकायत कई बार नगर पालिका चेयरमैन व अधिकारियों से की गई। कोई सुनवाई नहीं हुई। अब सोशल मीडिया के माध्यम से मोहल्ले की बदहाल सड़क व नालियों की समस्या उठाता हूं। शायद जिम्मेदारों की नजर पड़ जाए। रामनाथ देविरया पूर्वी की नंदिनी पांडेय ने कहा कि सड़क और नाली टूटने से यहां बारह महीने पानी लगा रहता है। मरम्मत के अभाव में सड़क पर गड्ढे बड़े हो गए हैं। हिचकोले खाने से बच्चों को चोट न पहुंचे इसलिए स्कूल वाहन घर तक नहीं आते। बच्चों को छोड़ने व लाने के लिए मुख्य सड़क तक जाना पड़ता है। भारतीय समाचार पत्र विक्रेता संघ के अध्यक्ष लोकेश शरण तिवारी का कहना है कि वह रोज भोर में उठकर शहर की विभिन्न गलियों में अखबार बांटते हैं। सड़कों पर गड्ढे व जलभराव होने से अखबार का बंडल पानी में गिर जाता है। रोज आने-जाने से हिचकोले सहने की आदत हो गई है। अंजान लोगों के लिए अंधेरे में चलना खतरे से खाली नहीं है।
30 सड़कों के निर्माण की मिली है मंजूरी
नगर पालिका की अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि शहर की 30 सड़कों के निर्माण के लिए मंजूरी मिल गई है। कुछ सड़कों का टेंडर निकाला गया है। अन्य सड़कों का शासन में प्रस्ताव भेजकर मरम्मत कराया जाएगा।