हर सपने को साकार होने के समान है राम मंदिर का शिलान्यास
राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े महेश मणि ने कहा, अयोध्या में लगी थी एसएलआर की गोली
राम ने बचाई थी जान, 24 अक्तूबर 90 को पैदल कूच कर पहुंचे थे अयोध्या
सुरेंद्र वत्स
रुद्रपुर (देवरिया)। बात वर्ष 1990 की है। तब देश में रामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन की लहर चल रही थी। प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। देशभर से कारसेवक अयोध्या कूच कर रहे थे। रुद्रपुर तहसील के महेशपुर गांव के एक 22 वर्षीय युवक ने भी अयोध्या में जाकर कार सेवा करने की ठान ली थी। रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़े महेश मणि का कहना है कि राम मंदिर का शिलान्यास देखने के बाद जीवन का हर सपना पूरा होने जैसा लग रहा है।
एसएलआर की गोली झेलने वाले महेश मणि 24 अक्टूबर 90 को पैदल अयोध्या कूच किए थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 में विश्व हिंदू परिषद की ओर से 30 अक्टूबर को अयोध्या में कार सेवा का एलान कर दिया गया। उस दौरान देश भर से लोग रामजन्म भूमि को मुक्त कराने अयोध्या कूच रहे थे। सरकार हिंदुवादी संगठनों और भाजपा से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल रही थी। रामभक्त कारसेवक गांव की पगडंडियों से होकर अयोध्या पहुंचने का प्रयास कर रहे थे। वह 28 अक्टूबर को दस लोगों के साथ अयोध्या के लिए चले। कौड़ीराम के पास सबको पुलिस ने घेर लिया। सभी लोगों को एक स्कूल में ले जाया गया जहां से लघुशंका के बहाने महेश और उनके साथ दो लोग फरार हो गए।
उन्होंने कहा कि वह लूंगी -बंडी पहन कर गांव में सौंदर्य प्रसाधन बेचने वालों का भेष बना लिए। तीन दिन पैदल चलकर गांव की पगडंडी से होते हुए अयोध्या पहुंचे। अयोध्या की पैरा मिलिट्री फोर्स लगाई गई थी। 30 अक्टूबर को अशोक सिंगल को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन कार सेवक अयोध्या में डटे रहे। दो नवंबर को भेष बदलकर उमा भारती अयोध्या पहुंच गईं। कारसेवकों को जन्म भूमि तक जाने को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छूट रहे थे। अयोध्या के चप्पे-चप्पे पर हथियार बंद फोर्स से जूझते हुए कार सेवकों का जत्था आगे बढ़ रहा था। जय श्रीराम के जयघोष के साथ उमा भारती के नेतृत्व में हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी से आगे बढ़ रहे थे।
इसी दौरान सीआरपीएफ की एक टुकड़ी उमा भारती को घसीटते हुए उठा ले गई। कारसेवक आंसू गैस के प्रभाव से बचने को मुंह पर पानी से भीगी बोरी लगा लिए थे। लाल कोठी के आगे बढ़ रहे कार सेवकों के जत्थे पर फायरिंग की जाने लगी जिससे कार सेवक जमीन पर गिरने लगे।
घायल और मृत कार सेवकों को उठा रहे महेश मणि के बाए जबड़े में एसएलआर राइफल की गोली लग गई। उन्होंने बताया कि जब वह जय श्रीराम का जयधोष कर रहे थे तभी गोली उनके बाएं जबड़े में दांत तोड़ते हुए निकल गई। वह बेहोश होकर गिर गए। दूसरे दिन उन्हें फैजाबाद के अस्पताल में होश आया। उस मंजर को यादकर वह रोमांचित हो उठते। उन्होंने कहा कि महेश की जान तो राम ने यह दिन देखने के लिए बचाई थी।