संवाद न्यूज एजेंसी
कंचनपुर। वन दारोगा और वन रक्षक ने सरकारी लकड़ी को एक जगह छिपा कर रख दी थी। उसको वन क्षेत्राधिकारी ने सोमवार की रात में पकड़ लिया। उन्होंने दोनों वन कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए वन अधिकारी को पत्र लिखा है। तरकुलवा क्षेत्र में करीब एक सप्ताह पूर्व भीषण आंधी आई थी। इसमें देवरिया-कसया मार्ग पर दर्जनों भूटेल के पेड़ टूट कर गिर गए थे।
जानकारी होने पर वन विभाग के अफसरों ने वन दारोगा तथा वन रक्षक को लकड़ियों को कब्जे में लेने का निर्देश दिया। उधर स्थानीय वन कर्मियों ने उच्चाधिकारियों के निर्देश की अनदेखी की। उन्होंने अपने दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बरतते हुए इस कार्य में अभिरुचि नहीं दिखाई। इतना ही नहीं उनके द्वारा कुछ लकड़ियों को चोरी से बेचने की नियत से सिरसिया गोठा के निकट एक स्थान पर छिपा कर रख दिया गया। इसकी जानकारी जब वन क्षेत्राधिकारी को हुई तो वे सोमवार की रात में सिरसिया गोठा मार्ग पर पहुंच गए और छुपा कर रखी 55 बोटा भूटेल की लकड़ी को पकड़ लिया।
रेंजर विजय कुमार ने बताया कि वन दारोगा सुभाष चंद्र यादव और वन रक्षक हरिकेश गोंड द्वारा चोरी- चुपके बेचने की नियत से लकड़ी को एक सुनसान स्थान पर छिपा दिया गया था। उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है।