रुद्रपुर। जब से शिक्षा सरकार देने लगी, तबसे उसका असर कम होने लगा। पुरातन काल में भारतीय शिक्षा समाज द्वारा पोषित रही है, तब भारत वर्ष विश्व गुरु रहा है। शिक्षा समाज के लिए अति आवश्यक है। यह बात शिवम सेवा संस्थान द्वारा संचालित साहु राजाराम शिक्षा निकेतन में आयोजित संगोष्ठी और वार्षिकोत्सव को संबोधित करते हुए संगठन मंत्री, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के डॉ. बालमुकुंद ने कही।
उन्होंने कहा की भारतीय शिक्षा नीति के संदर्भ में देश भर से करीब निन्यानबे लाख लोगों ने अपने सुझाव दिए थे। जिसके आधार पर भारतीय शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार कर, लागू किया गया है।
जब शिक्षक स्वयं ज्ञान अर्जित कर, उसे विद्यार्थियों में बांटेगा, तभी समाज बेहतर होगा। बिना शिक्षा मनुष्य, सामाजिक प्राणी नहीं बन सकता। आज यही कारण है कि अभिभावक भी अपने बच्चों के बेहतर शिक्षा की चिंता कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से विद्यालय और शिक्षक के साथ सहयोग करने की मानसिकता रखे। इस दौरान छात्रों ने मनोहारी कार्यक्रम प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया। संगोष्ठी को नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल, छठेलाल निगम, अध्यक्ष सुधा निगम, संपर्क प्रमुख दीपेंद्र, प्रबंधक मृत्युंजय प्रसाद विशारद, प्रधानाचार्य राम भगत शर्मा, सुरेन्द्र तिवारी आदि ने संबोधित किया। संवाद