- दक्षिणी पाए के पास नदी कर रही बेतहाशा कटान, विभाग बेपरवाह
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। सरयू नदी तट पर मोहन सेतु का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसे 2017 में बनकर तैयार हो जाना था। दक्षिणी पिलर के पास बेतहाशा कटान से पुल का निर्माण अधर में लटक गया। नदी का पाट चौड़ा हो जाने के कारण एक बार फिर मॉडल स्टडी कराने की संभावना है।
27 फरवरी 2014 को शासन से मंजूरी मिलने पर ब्रिज कारपोरेशन की ओर से पुल निर्माण कार्य शुरु कराया गया था। जिसे 2017 में पूर्ण करा लेने की योजना था। 9557.38 लाख की लागत से 39 पिलरों पर करीब 1200 मीटर लंबा, 7.5 मीटर चौड़ा और 11.33 मीटर ऊंचा पुल बनाने का कार्य शुरु किया गया था। लोगों के अनुसार मोहन सेतु के बनकर तैयार होने से पहले ही 2021 में धनाभाव के कारण कार्य बंद कर दिया गया। 2022-23 में दोबारा रिवाईज स्टीमेट जारी होने के बाद ब्रिज कारपोरेशन की जगह मित्तल ब्रदर्स से कार्य शुरु कराया गया। जिससे पुल के तैयार हो जाने की उम्मीद जगी थी। लोगों का कहना है कि कटान के कारण पाट चौड़ा हो जाने पर तत्कालीन डीएम की रिपोर्ट पर 2024 में रुड़की की आईआईटी टीम से मॉडल स्टडी कराया गया है। इसमें चार पाए बढ़ाने की बात कही गई। इस पर काम भी शुरू हुआ, लेकिन वर्तमान समय में नदी में हो रही कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रतिदिन नदी डेढ़ से दो फीट जमीन को निगल रही है। पुल के दक्षिणी पाये से पूरब तक करीब तीन किलोमीटर कटान हो रही है। इससे पायों की संख्या और बढ़ानी पड़ सकती हे। और बढ़ाने लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह कटान होता रहा तो पुल का सपना अधूरा रह जायेगा। हो रहे कटान के कारण लोग पुल को पूर्ण कराने के लिए एक बार फिर मॉडल स्टडी कराने की बात कह रहे हैं।
इंसेट में-
2014 में तत्कालीन राज्यसभा सदस्य की पहल पर शुरु हुआ था कार्य
बरहज। मोहन सेतु के पूर्ण न होने से सरयू नदी पार परसियां-विशुनपुर देवार के गांवों का विकास अधर में है। जहां की आबादी करीब 6000 है। धन के अभाव में पुल निर्माण कार्य ठप होने पर तत्कालीन राज्यसभा सदस्य कनकलता सिंह के प्रयास पर रिवाइज इस्टीमेट स्वीकृत होने के बाद कार्य शुरू हुआ था, मगर परियोजना आज भी अधर में है।